गाजर का चोर
ताजपुर जंगल के राजा शेर सिंह ने अचानक अपातकाल मीटिंग बुलाई थी। सारे दरबारी जल्दी से आकर अपना आसन ग्रहण करने लगे। सबके मन में एक ही सवाल था की महाराज शेर सिंह ने ये मीटिंग क्यों बुलाई है? सबके मन में अलग अलग विचार आ रहे थे।थोड़ी देर में घोषणा हुई की महाराज पधार रहे है इतना सुनकर सब खड़े हो गये। राजा शेर सिंह दरबार में आये और उनके सिंहासन पर बैठते ही सब अपने अपने आसनों पर बेठ गये। राजा शेर सिंह ने बोलना शुरू किया " आप सब ये सोच रहे होंगे की मैने इतने कम समय में आपको एकत्रित होने को क्यों कहा, तो सुनिए जेसे की आपको पता है हमारी राजकुमारी को गाजर पसंद है लेकिन करीब एक महीने से हमारे खेत में से कोई गाजर चुराकर ले जा रहा है लेकिन कल तो वो चोर कुछ ज्यादा ही गाजर चुराकर ले गया जिससे अब राजकुमारी को खाने को भी कम पड रही है।" इतना कह कर राजा शेर सिंह थोडा चुप हुए और फिर बोले " हमें ये कहने में बड़ी शर्म महसूस हो रही है की हमारी इतनी बड़ी सेना भी उसे पकड़ने में असफल रही है।"
थोड़ी हिम्मत करके सेनापति घोडा सिंह खड़ा हुआ और सिर झुकाकर बोला "महाराज गुस्ताखी माफ़ लेकिन आप जानते ही है की हमने उस चोर को पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन वो हमारी पकड़ से बाहर है वो चालाक ही नही बहुत शातिर भी है।"
राजा शेर सिंह, सेनापति घोड़ा सिंह की बातों से संतुष्ट नहीं था। वह बोला "यदि हमारी सेना उस चोर को नही पकड़ पा रही है तो हम इस दरबार में घोषणा करते है की जो कोई भी उस चोर को पकड़ने में मदद करेगा उसे उचित इनाम दिया जाएगा।" इतना कह कर राजा शेर सिंह अपने सिंहासन पर से उठे और सेनापति घोड़ा सिंह की तरफ देख कर कहा की इस बात की घोषणा पूरे ताजपुर जंगल में करा दी जाए। इतना कह कर वो अपने महल की तरफ चले गये।
सेनापति घोड़ा सिंह भी इस चोर से परेशान थे क्योंकि उसको ना पकड़ने के कारण राजा शेर सिंह भी उनसे नाराज थे। उन्होंने तुरंत पुरे जंगल में घोषणा करवा दी।
सारे जंगल के जानवर उस चोर को पकड़ कर अपने राजा से इनाम पाने के बारे में सोच रहे थे और अब जंगल में चर्चा का विषय वह चोर ही था।
जंगल के आखिर में रानी कुतिया का घर था उसका पति शहर कमाने गया था और उसका एक बेटा था छोटा पप्पी जो सारे दिन सोता रहता था। रानी कुतिया ने घर के अन्दर जाकर आवाज दी "पप्पी उठ जाओ सूरज निकल आया ।" इतना कह कर पप्पी को पकड़ कर खड़ा किया और फिर बोली "पप्पी तुम सारे दिन सोते रहते हो ये अच्छी बात नही है देखो तुम कुछ काम धाम तो करते नही और निट्ठले सोते रहते हो।" वो फिर बोली "देखो हमारे पड़ोस के बाबु कुत्ते का बेटा कमा कर लाने लगा है।"
पप्पी को आज उसकी माँ की बात चुभ गई थी । वो खड़ा होकर बोला "माँ आज से में भी आपको अच्छा बनकर दिखाऊँगा।" इतना कह कर वो घर से निकल गया।
वो सीधा अपने दोस्त सोनू गिलहरी के पास पहुंचा। पप्पी को उदास देख सोनू बोला "अरे क्या बात है पप्पी तुम उदास हो कुछ हुआ है क्या?" पप्पी बोला "सोनू हमे भी कुछ काम करना चाहिए जिससे की हमारे माँ बाप का नाम रोशन हो क्योंकि माँ भी मेरी काम चोरी से तंग आ चुकी है, लेकिन हम करेंगे क्या ?" इस पर सोनू बोला "इतनी सी बात है, तुमने अपने राजा की घोषणा नहीं सुनी की जो कोई उनके राजमहल के खेत की गाजर के चोर को पकड़ेगा उसे इनाम दिया जाएगा।" पप्पी एक बार तो खुश हुआ लेकिन अगले ही पल वह उदास होते हुए बोला "सोनू जिस चोर को राजमहल के सिपाही नही पकड़ पाए उसे हम कैसे पकड़ेंगे ?" इस पर सोनू बोला "प्रयास करने में क्या जाता है।" इस पर पप्पी बोला "तो आओ आज से हम उस चोर को पकड़ने की तिकडम लड़ाते है।"
वो दोनों राजमहल के खेतो में पहुंचे। पप्पी ने वहाँ के सिपाहियों से बात की तो उसे पता चला की सिपाही सारी रात पहरा देते है लेकिन सुबह देखते है तो गाजर गायब मिलती है जबकि उनके सामने से ना कोई आता है और ना ही कोई जाता है।
पप्पी ने खेतों का जायजा लिया तो पाया की चोर पत्तो को ऐसे ही छोड़ जाता था और केवल गाजर ही ले जाता था। उसकी समझ में वो जानवर तो आ गया जो चोर था लेकिन वो उसे किसी दुसरे तरीके से पकड़ना चाहता था।
वो सोनू को लेकर पंसारी की दूकान पर गया उसने वहाँ से कुछ ख़रीदा और उसको लेकर वापिस राजा के गाजर के खेतों में पहुंचा। उसने गाजर के खेतो में कुछ किया और सोनू को लेकर वापिस अपने घर की तरफ चल दिया। रास्ते में सोनू ने पप्पी से पुछा "तुमने पंसारी की दूकान से क्या ख़रीदा और उसका गाजर के खेतों में क्या किया ।" पप्पी बोला "तुम सुबह देखना चोर खुद बोलेगा की मैंने चोरी की है ।" सोनू कुछ समझ नहीं पा रहा था। जबकि पप्पी मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
पप्पी सुबह होते ही सोनू के घर पहुंचा और उसे लेकर वैध दिनू बकरे की दूकान के सामने छुप कर बेठ गया। सोनू से रहा नही गया। वो बोला "पप्पी ये क्या हो रहा है मेरी कुछ समझ में नही आ रहा है।" पप्पी ने उसे चुप रहने को कहा और बोला "थोड़ी देर में चोर यहाँ अपना इलाज कराने आने वाला है।" थोड़ी देर इंतजार करने पर पप्पी ने सोनू को इशारा करके बताया "वो देखो चोर" सोनू ने उत्सुकता से देखा तो पाया की गंगू खरगोश अपना पेट पकडे तेजी से दीनू वैध की दुकान में घुसा। वो दोनों भी तुरंत अन्दर गए और उसे पकड़ कर राजा शेर सिंह के दरबार में ले गए। पप्पी बोला "महाराज ये रहा गाजर का चोर" राजा शेर सिंह चकित था उसने पप्पी से पुछा "तुमने एक दिन में ही इसको पकड़ लिया लेकिन ये कैसे साबित होता है की यही चोर है।" पप्पी बोला "महाराज इसके तीन सबूत है पहला ये की गाजर खरगोश का पसंदीदा भोजन है, दूसरा ये की खेतो में कड़ा पहरा होते हुए भी कोई आपकी गाजरों को चुरा लेता था और पत्तो को छोड़ देता था और ये तभी हो सकता है की कोई उन्हें जमीन के नीचे से रास्ता बना कर चुराए और आप जानते हो की खरगोश ही जमीन के अन्दर रास्ता बना सकता है और अंत में ये जो गंगू खरगोश पेट पकड़े खड़ा है वो इसलिए की मेने रात को गाजरों में जुलाब का चूर्ण लगा दिया था और उन्ही गाजर को खाने से इसका पेट खराब हुआ है। में कल जुलाब का चूर्ण लाया ये आप पंसारी से पता कर सकते है। में समझ तो गया था की ये गंगू खरगोश ही है जो चोर है लेकिन में उसे रंगे हाथ पकड़ना चाहता था। राजा शेर सिंह के थोड़े दबाव से ही गंगू खरगोश ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। सेनापति घोड़ा सिंह ने भी चैन की सांस ली।
राजा शेर सिंह ने पप्पी को इनाम दिया और उसे अपने महल में ख़ास गुप्तचर की नौकरी भी दी। सोनू गिलहरी अब समझा था और वो पप्पी का दोस्त होने पर गर्व महसूस कर रहा था।
अब पप्पी की माँ भी अपने बेटे से खुश थी।
Saturday, November 5, 2016
गाजर का चोर
सच्चाई का सच
सच्चाई का सच
आज टीचर सब बच्चो का होमवर्क चेक करने वाले है और इसी बात पर राजू की बैचेनी बढ़ रही थी | राजू ने जैसे ही क्लास में एंट्री की तो उसने देखा की उसका वातावरण बहुत ही गंभीर था क्योंकि इस पीरियड का टीचर बहुत सख्त था | वो पढ़ाने में तो सख्त था ही साथ में यदि कोई स्टूडेंट उसका होमवर्क नहीं करके लाता था तो वो उसको कड़ी सजा देता था | राजू वैसे तो पढाई में ठीक है लेकिन पिछले हफ्ते उसके चाचाजी की लड़की शादी थी इस कारण वो अपना होमवर्क नहीं कर पाया था | उसने मन ही मन सोचा आज तो ये टीचर मुझे नहीं छोड़ेगा |
कुछ देर में टीचर ने क्लास में कदम रखा तो सब लोग खामोश हो गए | टीचर ने अटेंडेंस ली और फिर वो एक एक करके सबका होमवर्क चेक करने लगा | राजू अब और भी ज्यादा नर्वस हो गया था | राजू कभी भी अपने होमवर्क के बारे में झूठ नहीं बोलता था लेकिन आज उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था उसका मन कर रहा था की आज वो कुछ झूठ बोल दे | इतने में उसका नंबर आ गया | टीचर ने उससे होमवर्क की कॉपी मांगी तो राजू ने सही सही बता दिया लेकिन टीचर ने उसकी कोई बात नहीं सुनी और उसकी पिटाई करते हुए बोला की ऐसे बहाने उसने बहुत सुने है | राजू पिटाई से दुखी नहीं था बल्कि उसने जो सच बोला उसके बाद भी टीचर ने उसकी बात नहीं मानी वो उससे दुखी था |
राजू ने सोचा की जब सच्चाई पर भी उसकी पिटाई हुई है तो आगे से वो झूठ ही बोलेगा जिससे की वो पिटाई से बच सके |
अब जब भी कोई काम होता तो राजू झूठ बोल देता था और वो टीचर की पिटाई से बच जाता था | इस कारण अब वो पढाई के प्रति लापरवाह हो गया था क्योंकि उसे पता था की वो झूठ बोल कर बच जाएगा |
राजू के पापा उसको बहुत दिनों से देख रहे थे की राजू पढाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था और थोडा लापरवाह भी हो गया था | उसके पापा ने जब पूछा तो उसने सब सच बता दिया | अब राजू के पापा भी परेशान हो गये | उन्हें पता था की राजू जो कर रहा था वो गलत था लेकिन उसके टीचर ने जो किया था वो भीं गलत था | राजू के पापा ने राजू और उसके टीचर को एक साथ बैठाया | राजू के पापा ने टीचर को राजू के बारे में सब सच बता दिया | टीचर उनकी बात सुनकर स्तब्ध रह गया | टीचर ने कुछ देर सोचा और फिर राजू के पिता की तरफ मुखातिब होकर बोला “ अब आप ही बताएं की हम कोई बच्चा झूट बोल रहा है या सच इसका पता कैसे लगायें ?” अब स्तब्ध होने की बारी राजू के पिता की थी |
राजू के पिता काफी देर तक सोचते रहे लेकिन उनकी समझ में टीचर के सवाल का जवाब नही आ रहा था |
कुछ देर सोचने के बाद टीचर बोला “ देखिये इस सवाल का जवाब आप तो क्या कोई भी नही दे पायेगा और ये जब से सृष्टि बनी है तब से ही ये सवाल ज्यो का त्यों है इसलिए हमे इसको ऐसे ही छोड़ देना चाहिए और अपनी इन्द्रियों का इस्तेमाल और भी अच्छी तरीके से करना चाहिए और उनके अनुसार अपने अपने कर्म करने चाहिए जैसे की राजू यदि झूठ का साथ देता है तो आपको उसको देखते रहना है की वो कोई ऐसी हरकत तो नही कर रहा जिससे लगे की वो कुछ गलत कर रहा है और यदि वो ऐसा कर रहा है तो उसको आपको टोकना है और उसे सच्चाई पर चलने को कहना है | में भी अपनी इंद्री का और अच्छी तरह से इस्तेमाल करूंगा ताकि जो सच बोल रहा हो उसके साथ अन्याय न हो |”
राजू के पिता अब थोडा संतुष्ट हुए | वे टीचर की बातों से समझ गए थे की सच्चाई का सच पता लगाना मुस्किल है आज के जमाने में
Wednesday, October 5, 2016
बेरोजगारी की अकड़
मुकेश ने राजू से पुछा " आपका ड्राइवर कहाँ है कुछ दिनों से दिखाई नही दे रहा?"
राजू बोला "क्या बताऊँ एक दिन वो मेरा फोन नहीं उठा रहा था तो मैने उससे पूछा बस इसी बात पर मुझसे गुस्सा हो कर चला गया।"
"सुनने में आया की उसकी आर्थिक हालात ठीक नही है इसलिए वो अपने बीबी बच्चो सहित अपने ससुराल चला गया है ।" राजू ने आगे कहा। "उसको मेने दो बार फोन भी किया लेकिन वो मना कर रहा था काम करने के लिए"
मुकेश बोला "आजकल के लड़को में इतनी गर्मी कैसे आ गई है भूखे मर जायेंगे लेकिन सुलह नहीं करेंगे और चाहे बेरोजगार रहना पड़े लेकिन अकड़ नहीं जायेगी।"
मुकेश आगे बोला "हम जब जवान थे तो नॉकरी के लिए बहुत कुछ सुनते थे।"
राजू बोला "ये सब खान पान और संगति का असर है जो युवको को विन्रम रहने की जगह उग्र बना रहा है और इस हिसाब से तो आगे का समय और भी खराब होगा।"
मुकेश ने कहा "तुम बिलकुल सच कह रहे हो ना जाने आगे क्या समय आने वाला है?"
राजू और मुकेश भविष्य की सोच में खो गए
Monday, October 3, 2016
अहिंसा
में जैसे ही मॉल से बाहर निकला तो देखा की एक युवक एक महंगी कार के पीछे भाग रहा था और कार के ड्राईवर साइड के शीशे पर हाथ मार कर ड्राईवर को बाहर आने को कह रहा था।
ड्राईवर ने अन्दर से ही इशारे से पुछा "क्या हुआ?" तो बाहर वाले युवक ने गुस्से में कहा "बाहर निकल तूने गाडी बेक करते व्यक्त मेरी खड़ी गाडी में खरोंच मारी है।"
सुनते ही कार में बेठा युवक गुस्से में बाहर आया और बाहर वाले युवक से बोला "तूने गाडी के हाथ कैसे लगाया, दोबारा लगा के दिखा फुटबॉल बना दूंगा थोड़ी ही तो खरोच है गाडी में।"
इतना सुनते ही पहला वाला युवक सहम गया और ढीला पड़ गया।
कार वाला युवक कार में बैठते हुए बोला "ये मत समझना की आज गाँधी जयंती है तो में चुपचाप अहिंसा से तुम्हारी बाते सुन लूँगा।" और वह कार लेकर चला गया।
वहां खड़ा बुजुर्ग बोला "वाकई यदि कार वाला युवक थोडा सख्त नहीं बोलता तो बाहर वाला युवक उसकी पिटाई कर देता।
इसपर दूसरा बुजुर्ग बोला "सही कहते हो आज के समय में छोटी हिंसा को उससे थोड़ी बड़ी हिंसा से ही हराया जा सकता है और अहिंसा तो बातो में ही ठीक लगती है।"
Saturday, October 1, 2016
बरसात का फर्क
बरसात का फर्क
राजू आज ही शहर से अपने दादाजी के गाँव आया था।
तेज बरसात हो रही थी।
दादाजी का घर मिटटी का बना था और छत घास फूस की बनी थी।
तेज बरसात के कारण छत से पानी टपक रहा था जिससे कच्ची जमीन पर छोटी नाली बन गई थी और पानी दादाजी और राजू की खाट के नीचे से निकल कर खुले आँगन में जा रहा था। राजु ये देख कर आश्चर्यचकित था की दादाजी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
उसने उत्सुकता से पुछा "दादाजी बारिश का पानी छत से टपक रहा है लेकिन आप इसके लिए कुछ नहीं कर रहे जबकि हमारे शहर के घर में यदि बारिश का पानी टपकता है तो मम्मी पापा परेशान हो जाते है और पूरा घर पानी से भर जाने के कारण बहुत बेकार लगता है।"
दादाजी ने प्यार से राजू के सिर पर हाथ रखा और मुस्कुराते हुए बोले।"राजू शहर में बरसात आने पर पानी इक्कठा हो जाता है क्योंकि ना तो उसको निकलने का कोई रास्ता है और ना ही वो जमीन के अन्दर जा सकता है इसलिए की शहर में लोगो ने जमीन को सीमेंट और तारकोल से पक्का कर दिया है, जिसके कारण वहां गंदगी फेल जाती है। यहाँ गाँव में पानी जमीन में चला जाता है और यदि इक्कठा होता है तो वो गाँव से दूर तालाब में इक्कठा होता है।" थोड़ी देर रूककर दादाजी बोले "रही पानी टपकने की बात तो देखो हमे तो इसे देख कर आनन्द की अनुभूति हो रही है इसलिए की ये बाहर जा रहा है शहरों की तरह मकानों में ही रूक नहीं रहा।"
राजू ने महसूस किया की दादाजी ठीक कह रहे है। यहाँ का टपकता पानी उसे बिलकुल भी खराब नहीं लग रहा था।
राजू भी अब उस टपकते पानी को देख कर आनन्द ले रहा था।
राजू सोच रहा था की वाकई शहर और गाँव की बरसात में फर्क है।
रोटी के लिए
रोटी के लिए
पहली बार दिनेश का बुजुर्ग पिता शहर में आये थे।
रेलवे स्टेशन से बाहर आकर दिनेश ने ऑटो किराये पर लिया और उसमे अपने पिता के साथ अपने घर की तरफ चल दिए।
आधा रास्ता पार हुआ तो दिनेश के बुजुर्ग पिता बोले "बेटा ये शहर में सब लोग इधर से उधर भाग रहे है कोई स्कूटर से भाग रहा है कोई अपनी गाडी से भाग रहा है में देख रहा हूँ की किसी को एक दुसरे से बात करने का समय ही नहीं है ऐसा क्या हुआ है इन लोगो के साथ?"
दिनेश बोला "देखा पिताजी आप कहते हो ना की शहर में तुम क्या करते हो और मुझे कहते रहते हो की गाँव वापिस आ जाओ शहर ने क्या रखा है...आप ही देख लो लोग रोटी के लिए कितनी भाग दौड़ करते है।"
दिनेश के बुजुर्ग पिता थोड़ी देर सोच कर बोले "बेटा मेरे बाल ऐसे ही सफेद नही हुए है, ये दौड़ रोटी के लिए नही बल्कि ऐशो आराम की चीजो के लिए हो रही है क्योंकि रोटी अभी भी इतनी महंगी नहीं हुई की इंसान उसे इतनी मेहनत करके भी न पा सके।"
दिनेश को अपने पिता की बात सच लगी थी वाकई हम रोटी के नाम पर ऐशो आराम के पीछे भाग कर शहरो में अपना जीवन व्यर्थ कर रहे है। जिससे हम एक दुसरे से बाते करना ही भूल गए है और जीवन कैसे जीते है ये प्रश्न तो हमसे काफी पीछे छूट गया है।
Friday, September 30, 2016
श्राद्ध
वृद्ध आश्रम के बाहर भारी भीड़ थी।
पुरे शहर के गरीब और भिखारी जमा थे।
आज किसी अमीर आदमी का श्राद्ध था और इसलिए उसका बेटा सबको खाना खिलाने वाला था।
वृद्ध आश्रम की दो नर्स आपस में बात कर रही थी।
एक बोली "कितने भाग्यशाली हे वो माँ बाप जिनका इतना श्रवण जेसा बेटा है जो उनका श्राद्ध इतने बड़े स्तर पर कर रहा था।"
दूसरी बोली "अरे क्या श्रवण हें, मैंने सुना है की उनका नौकर कह रहा था की ये बेटा इसलिए श्राद्ध करा रहा था क्योंकी उसके माँ बाप मर गए है तो उसे अब इस वृद्ध आश्रम में उनके रहने के पैसे नहीं देने पड़ेंगे।"
पहले वाली नर्स बोली " इसका मतलब ये श्राद्ध नही बिज़नस में प्रॉफिट की पार्टी है।"
इतना सुनकर दूसरी नर्स हसने लगी।
दूर जिनका श्राद्ध था वो दोनों फोटो में भी पीड़ा की मुस्कान लिए मुस्कुरा रहे थे।
Thursday, September 29, 2016
भारत पाकिस्तान
दिवाली के कपडे
दिवाली के कपडे
मकान मालकिन दिवाली पर घर की साफ़ सफाई करवा रही थी।
उसका बेटा भी उसके साथ था।
पास में ही उनकी नोकरानी अपने बेटे के साथ घर की सफाई कर रही थी।
नौकरानी का बेटा भी मालकिन के बेटे की उम्र का ही था।
"बेटा ये कपडे पहन लेना दिवाली पर" मालकिन ने पिछले साल के कपडे निकालकर अपने बेटे को कहा।
इस पर बेटा बोला "माँ अब तो ये एक साल पुराने हो गए मुझे नये कपड़े चाहिए ये में दिवाली पर नही पहनूंगा।" माँ ने दुलार से कहा "बेटा ये बड़े महंगे कपड़े है और देखो नये ही तो हैं।" बेटे ने इठलाते हुए कहा "माँ कह दिया ना में नही पहनूंगा तो नही पहनूंगा मुझे नये चाहिए।" माँ ने भी वारी जाऊं वाली शक्ल बनाई और मुस्करा कर कहा "ठीक है नये ले लेना बस"
उसका बेटा बड़ा खुश हुआ।
उधर नोकरानी और उसका बेटा ये सब देख और सुन रहे थे। नोकरानी ने अपने बेटे के फटे कपड़ों की तरफ देखा। उधर उसका बेटा ललचाई निगाहों से मालकिन के बेटे के पुराने कपड़ो को देख रहा था।
नोकरानी समझ गई थी और अब उसका दिल भर आया।
उसने बड़ी मुस्किल से कहा "मालकिन ये पुराने कपड़े यदि आप मेरे बेटे को दे देंगी तो मेरे बेटे का भी दिल खुश हो जाएगा।"
मालकिन ने थोड़ी देर सोचा और कहा "ठीक हें ये लो कपडे।"
कपड़े लेकर नोकरानी का लड़का बहुत खुश हुआ।
इधर दोनों मालकिन और नोकरानी माँ खुश थी की उनके बेटे खुश है।
अंतर सिर्फ जरूरत का था।
Wednesday, September 28, 2016
गरीब
राजू की माँ अपना काम खत्म करके झोपडी से बाहर आकर राजू के साथ फूटपाथ पर लेट गई।
राजू के हाथ में एक अख़बार का टुकड़ा था वो उसे लेटे हुए ही पढ़ रहा था ।
माँ को देखते ही राजू बोला " माँ देखो जो सामने महल जैसी बिल्डिंग बनी है उसके बारे में लिखा है की इसके अन्दर 150 कमरे है, 600 नौकर है, इसके अन्दर ही हेलीकाप्टर उतर सकता है, इसमें कसरत करने की जिम है, 150 कार खड़ी करने की जगह है और ये 35 मंजिल की है। इस बिल्डिंग के मालिक के बच्चे हेलीकाप्टर से स्कूल जाते है और इसकी मालकिन 50 लाख की साडी पहनती है और डेढ़ करोड़ की चाय पीती है।"
इतना कह कर राजू चुप हो गया।
कुछ देर चुप होकर राजू फिर बोला "माँ देखो ना हम तो कच्ची झोपडी में रहते है और फूटपाथ पर सोते है और हमे सही से रोटी भी नसीब नही होती, और तो और में स्कूल बड़ी मुस्किल से जा पाता हूँ क्योंकि पिताजी मेरी फीस नहीं दे पाते, क्या हमारा नसीब ख़राब है?"
माँ जो पुरे दिन के काम से निढाल थी उसने डांटते हुए राजू को कहा "चुपचाप सो जाओ इन फालतू बेकार की चीजों पर ध्यान मत दो।" डांट सुनकर राजू ने आँखे बंद कर ली।
माँ ने भी करवट ली और आँखों में आंसू लेकर बडबडाने लगी, हम तो गरीबी और भुखमरी से पहले ही पस्त है उपर से अमीरी का इतना गुणगान करवाते है ये लोग अखबारों में की कई बार तो गरीब लोग अपने जीवन से ही घृणा करने लगते है। अरे भई अमीर हो तो ठीक है लेकिन अमीरी दिखा कर गरीब का उपहास तो मत करो।"
उधर राजू आँख बंद किये अपने नसीब को कोस रहा था की उसके पास ये सब क्यों नहीं है।
राजू के दिल में नकारात्मक सोच ने घर कर लिया था।
माँ सोच रही थी कल किसी और फूटपाथ पर जाकर रहेंगे ताकि राजू इस बिल्डिंग को देख ना सके और उसके दिमाग में यदि कोई नकारात्मक सोच घुसी हो तो वो उसे भूल जाए।
दलित
"माँ हम यहाँ क्यों छुपकर बैठे है ?" छोटे राजू ने माँ के आँचल से निकलकर पूछा।उसकी माँ उसे छुपाये हुए एक कोने में बेठी थी।
इसपर माँ ने उसे अंगुली से चुप रहने का इशारा किया और अपनी साँसों को काबू करते हुए बोली "बेटा चुप रहो बाहर दंगा हो रहा है और हिन्दू मुसलमान आपस में लड़ रहे है।"
राजू ने कहा " माँ फिर हम क्यों छुप रहे है क्योंकि हम तो निचली जाती के है, सब लोग हमे दलित दलित कहते है कोई हिन्दू मुसलमान तो कहता नहीं?"
राजू की बाते सुनकर उसकी माँ का गला भर आया और धीरे से बोली "बेटा ये लोग हमे समय के अनुसार इस्तेमाल करते है दंगो में हम हिन्दू मुसलमान होते है और किसी योजना का लाभ लेना हो तो हम नीच जाति के है पिसना दोनों बार हमे ही पड़ता है,तू अभी बहुत छोटा है इन बातो के लिए जब बड़ा होगा तो सब समझ में आ जाएगा|"
उसकी माँ इतना कह कर चुप हो गई और घबराई निगाहों से बाहर देखने लगी और राजू फिर से माँ के आँचल में छुप गया।उसे थोडा तो समझ में आ रहा था की वो लोग इस समाज की कठपुतली है।
Friday, September 9, 2016
धम॔निरपेक्षता
जेलर ने अपने जूनियर से कहा "जाओ जेल में घोषणा करवा दो की कल श्रीराम कथा का पाठ है सब कैदियों को जमा होकर इस पाठ को शांति पूर्वक सुनना है।"
इतना सुनकर जेलर का जूनियर बोला" सर में प्रार्थना करता हूँ की सारा देश ही जेलखाना बन जाये।"
इसपर जेलर थोड़ा आश्चर्यचकित होकर बोला "मैं तुम्हारी बात समझा नहीं ।" जूनियर बोला" देखिये सर हम कई सालों से इस जेल में कभी श्रीराम का पाठ करवाते है कभी कुरान का पाठ कभी यीशु मसीह का लेसन और कभी सिक्खो के ग्रन्थ का पाठ और सारे कैदी बिना कुछ कहे इन सबको सुनते है चाहे वो किसी भी धर्म के हों वे कभी नहीं कहते की हम ये सब नहीं सुनेंगे।" जूनियर ने थोड़ी सांस ली और बोला " इसलिए में चाहता हूँ की मेरा सारा देश जेलखाना बन जाए ताकि वहां धर्म के नाम पर लोग बट ना सकें।"
जेलर ने उठते हुए कहा " काश तुम्हारी बात सच हो जाए तो हमारा देश स्वर्ग बन जाये।"
Wednesday, September 7, 2016
शराफत
"अरे यार राजू तो बहुत शरीफ लड़का है उससे तो में यूँ ही पैसे ले लूँगा और दूंगा भी नहीं और देखना वो मुझसे मांगेगा भी नहीं|" विकास ने सुरेंद्र से कहा और वो दोनों जोर जोर से हंसने लगे।
राजू ये सब सुन रहा था।
उसे बड़ा दुःख हुआ की परोपकार का ये नतीजा होता है इसी परोपकार की वजह से उसे काफी नुकसान हुआ था लेकिन वो सोचता था कि वे सब लोग मजबूर हैं इस कारण वो उसके पैसे दे नहीं पाते है।
बीरू, राजू का दोस्त जो उसे हमेशा समझाता रहता था कि ये लोग तुम्हारा गलत फायदा उठा रहे है लेकिन राजू नहीं समझता था आज उसे उसकी बात का अहसास हो रहा था की वह सही कहता था।
राजू ने अब विकास ओर सुरेंद्र को पैसे देने बंद कर दिए।
"यार सुरेंद्र, राजू तो बहुत बेकार आदमी है।" विकास ने राजू के पैसे ना देने पर प्रतिकिर्या की।
राजू अब बेकार आदमी था उनके लिए लेकिन अब शराफ़त छोड़ कर वह अच्छा आदमी था अपने लिए।
Thursday, January 7, 2016
Our friends-Books
Always try to gift the books and magazines to your beloved once to spread the movements towards all over the world to read books and magazine