वृद्ध आश्रम के बाहर भारी भीड़ थी।
पुरे शहर के गरीब और भिखारी जमा थे।
आज किसी अमीर आदमी का श्राद्ध था और इसलिए उसका बेटा सबको खाना खिलाने वाला था।
वृद्ध आश्रम की दो नर्स आपस में बात कर रही थी।
एक बोली "कितने भाग्यशाली हे वो माँ बाप जिनका इतना श्रवण जेसा बेटा है जो उनका श्राद्ध इतने बड़े स्तर पर कर रहा था।"
दूसरी बोली "अरे क्या श्रवण हें, मैंने सुना है की उनका नौकर कह रहा था की ये बेटा इसलिए श्राद्ध करा रहा था क्योंकी उसके माँ बाप मर गए है तो उसे अब इस वृद्ध आश्रम में उनके रहने के पैसे नहीं देने पड़ेंगे।"
पहले वाली नर्स बोली " इसका मतलब ये श्राद्ध नही बिज़नस में प्रॉफिट की पार्टी है।"
इतना सुनकर दूसरी नर्स हसने लगी।
दूर जिनका श्राद्ध था वो दोनों फोटो में भी पीड़ा की मुस्कान लिए मुस्कुरा रहे थे।
Friday, September 30, 2016
श्राद्ध
Thursday, September 29, 2016
भारत पाकिस्तान
भारत में आतंक फेलाकर और उसकी आड़ में पाकिस्तान भारत को युद्ध के लिए उकसा रहा है। भारत को इसकी इस चाल में नहीं आना चाहिए क्योंकि नुक्सान भारत का ही होगा क्योंकि वह एक तेजी से बढ़ता राष्ट्र है। पाकिस्तान के पास तो खाने की भी कुछ नहीं है। ये वो उस कहावत को चरित्रार्थ करना चाहता है की हम तो डूबेंगे सनम तुम्हे भी ले डूबेंगे।
दिवाली के कपडे
दिवाली के कपडे
मकान मालकिन दिवाली पर घर की साफ़ सफाई करवा रही थी।
उसका बेटा भी उसके साथ था।
पास में ही उनकी नोकरानी अपने बेटे के साथ घर की सफाई कर रही थी।
नौकरानी का बेटा भी मालकिन के बेटे की उम्र का ही था।
"बेटा ये कपडे पहन लेना दिवाली पर" मालकिन ने पिछले साल के कपडे निकालकर अपने बेटे को कहा।
इस पर बेटा बोला "माँ अब तो ये एक साल पुराने हो गए मुझे नये कपड़े चाहिए ये में दिवाली पर नही पहनूंगा।" माँ ने दुलार से कहा "बेटा ये बड़े महंगे कपड़े है और देखो नये ही तो हैं।" बेटे ने इठलाते हुए कहा "माँ कह दिया ना में नही पहनूंगा तो नही पहनूंगा मुझे नये चाहिए।" माँ ने भी वारी जाऊं वाली शक्ल बनाई और मुस्करा कर कहा "ठीक है नये ले लेना बस"
उसका बेटा बड़ा खुश हुआ।
उधर नोकरानी और उसका बेटा ये सब देख और सुन रहे थे। नोकरानी ने अपने बेटे के फटे कपड़ों की तरफ देखा। उधर उसका बेटा ललचाई निगाहों से मालकिन के बेटे के पुराने कपड़ो को देख रहा था।
नोकरानी समझ गई थी और अब उसका दिल भर आया।
उसने बड़ी मुस्किल से कहा "मालकिन ये पुराने कपड़े यदि आप मेरे बेटे को दे देंगी तो मेरे बेटे का भी दिल खुश हो जाएगा।"
मालकिन ने थोड़ी देर सोचा और कहा "ठीक हें ये लो कपडे।"
कपड़े लेकर नोकरानी का लड़का बहुत खुश हुआ।
इधर दोनों मालकिन और नोकरानी माँ खुश थी की उनके बेटे खुश है।
अंतर सिर्फ जरूरत का था।
Wednesday, September 28, 2016
गरीब
गरीब
राजू की माँ अपना काम खत्म करके झोपडी से बाहर आकर राजू के साथ फूटपाथ पर लेट गई।
राजू के हाथ में एक अख़बार का टुकड़ा था वो उसे लेटे हुए ही पढ़ रहा था ।
माँ को देखते ही राजू बोला " माँ देखो जो सामने महल जैसी बिल्डिंग बनी है उसके बारे में लिखा है की इसके अन्दर 150 कमरे है, 600 नौकर है, इसके अन्दर ही हेलीकाप्टर उतर सकता है, इसमें कसरत करने की जिम है, 150 कार खड़ी करने की जगह है और ये 35 मंजिल की है। इस बिल्डिंग के मालिक के बच्चे हेलीकाप्टर से स्कूल जाते है और इसकी मालकिन 50 लाख की साडी पहनती है और डेढ़ करोड़ की चाय पीती है।"
इतना कह कर राजू चुप हो गया।
कुछ देर चुप होकर राजू फिर बोला "माँ देखो ना हम तो कच्ची झोपडी में रहते है और फूटपाथ पर सोते है और हमे सही से रोटी भी नसीब नही होती, और तो और में स्कूल बड़ी मुस्किल से जा पाता हूँ क्योंकि पिताजी मेरी फीस नहीं दे पाते, क्या हमारा नसीब ख़राब है?"
माँ जो पुरे दिन के काम से निढाल थी उसने डांटते हुए राजू को कहा "चुपचाप सो जाओ इन फालतू बेकार की चीजों पर ध्यान मत दो।" डांट सुनकर राजू ने आँखे बंद कर ली।
माँ ने भी करवट ली और आँखों में आंसू लेकर बडबडाने लगी, हम तो गरीबी और भुखमरी से पहले ही पस्त है उपर से अमीरी का इतना गुणगान करवाते है ये लोग अखबारों में की कई बार तो गरीब लोग अपने जीवन से ही घृणा करने लगते है। अरे भई अमीर हो तो ठीक है लेकिन अमीरी दिखा कर गरीब का उपहास तो मत करो।"
उधर राजू आँख बंद किये अपने नसीब को कोस रहा था की उसके पास ये सब क्यों नहीं है।
राजू के दिल में नकारात्मक सोच ने घर कर लिया था।
माँ सोच रही थी कल किसी और फूटपाथ पर जाकर रहेंगे ताकि राजू इस बिल्डिंग को देख ना सके और उसके दिमाग में यदि कोई नकारात्मक सोच घुसी हो तो वो उसे भूल जाए।
राजू की माँ अपना काम खत्म करके झोपडी से बाहर आकर राजू के साथ फूटपाथ पर लेट गई।
राजू के हाथ में एक अख़बार का टुकड़ा था वो उसे लेटे हुए ही पढ़ रहा था ।
माँ को देखते ही राजू बोला " माँ देखो जो सामने महल जैसी बिल्डिंग बनी है उसके बारे में लिखा है की इसके अन्दर 150 कमरे है, 600 नौकर है, इसके अन्दर ही हेलीकाप्टर उतर सकता है, इसमें कसरत करने की जिम है, 150 कार खड़ी करने की जगह है और ये 35 मंजिल की है। इस बिल्डिंग के मालिक के बच्चे हेलीकाप्टर से स्कूल जाते है और इसकी मालकिन 50 लाख की साडी पहनती है और डेढ़ करोड़ की चाय पीती है।"
इतना कह कर राजू चुप हो गया।
कुछ देर चुप होकर राजू फिर बोला "माँ देखो ना हम तो कच्ची झोपडी में रहते है और फूटपाथ पर सोते है और हमे सही से रोटी भी नसीब नही होती, और तो और में स्कूल बड़ी मुस्किल से जा पाता हूँ क्योंकि पिताजी मेरी फीस नहीं दे पाते, क्या हमारा नसीब ख़राब है?"
माँ जो पुरे दिन के काम से निढाल थी उसने डांटते हुए राजू को कहा "चुपचाप सो जाओ इन फालतू बेकार की चीजों पर ध्यान मत दो।" डांट सुनकर राजू ने आँखे बंद कर ली।
माँ ने भी करवट ली और आँखों में आंसू लेकर बडबडाने लगी, हम तो गरीबी और भुखमरी से पहले ही पस्त है उपर से अमीरी का इतना गुणगान करवाते है ये लोग अखबारों में की कई बार तो गरीब लोग अपने जीवन से ही घृणा करने लगते है। अरे भई अमीर हो तो ठीक है लेकिन अमीरी दिखा कर गरीब का उपहास तो मत करो।"
उधर राजू आँख बंद किये अपने नसीब को कोस रहा था की उसके पास ये सब क्यों नहीं है।
राजू के दिल में नकारात्मक सोच ने घर कर लिया था।
माँ सोच रही थी कल किसी और फूटपाथ पर जाकर रहेंगे ताकि राजू इस बिल्डिंग को देख ना सके और उसके दिमाग में यदि कोई नकारात्मक सोच घुसी हो तो वो उसे भूल जाए।
दलित
दलित
"माँ हम यहाँ क्यों छुपकर बैठे है ?" छोटे राजू ने माँ के आँचल से निकलकर पूछा।उसकी माँ उसे छुपाये हुए एक कोने में बेठी थी।
इसपर माँ ने उसे अंगुली से चुप रहने का इशारा किया और अपनी साँसों को काबू करते हुए बोली "बेटा चुप रहो बाहर दंगा हो रहा है और हिन्दू मुसलमान आपस में लड़ रहे है।"
राजू ने कहा " माँ फिर हम क्यों छुप रहे है क्योंकि हम तो निचली जाती के है, सब लोग हमे दलित दलित कहते है कोई हिन्दू मुसलमान तो कहता नहीं?"
राजू की बाते सुनकर उसकी माँ का गला भर आया और धीरे से बोली "बेटा ये लोग हमे समय के अनुसार इस्तेमाल करते है दंगो में हम हिन्दू मुसलमान होते है और किसी योजना का लाभ लेना हो तो हम नीच जाति के है पिसना दोनों बार हमे ही पड़ता है,तू अभी बहुत छोटा है इन बातो के लिए जब बड़ा होगा तो सब समझ में आ जाएगा|"
उसकी माँ इतना कह कर चुप हो गई और घबराई निगाहों से बाहर देखने लगी और राजू फिर से माँ के आँचल में छुप गया।उसे थोडा तो समझ में आ रहा था की वो लोग इस समाज की कठपुतली है।
"माँ हम यहाँ क्यों छुपकर बैठे है ?" छोटे राजू ने माँ के आँचल से निकलकर पूछा।उसकी माँ उसे छुपाये हुए एक कोने में बेठी थी।
इसपर माँ ने उसे अंगुली से चुप रहने का इशारा किया और अपनी साँसों को काबू करते हुए बोली "बेटा चुप रहो बाहर दंगा हो रहा है और हिन्दू मुसलमान आपस में लड़ रहे है।"
राजू ने कहा " माँ फिर हम क्यों छुप रहे है क्योंकि हम तो निचली जाती के है, सब लोग हमे दलित दलित कहते है कोई हिन्दू मुसलमान तो कहता नहीं?"
राजू की बाते सुनकर उसकी माँ का गला भर आया और धीरे से बोली "बेटा ये लोग हमे समय के अनुसार इस्तेमाल करते है दंगो में हम हिन्दू मुसलमान होते है और किसी योजना का लाभ लेना हो तो हम नीच जाति के है पिसना दोनों बार हमे ही पड़ता है,तू अभी बहुत छोटा है इन बातो के लिए जब बड़ा होगा तो सब समझ में आ जाएगा|"
उसकी माँ इतना कह कर चुप हो गई और घबराई निगाहों से बाहर देखने लगी और राजू फिर से माँ के आँचल में छुप गया।उसे थोडा तो समझ में आ रहा था की वो लोग इस समाज की कठपुतली है।
Friday, September 9, 2016
धम॔निरपेक्षता
धर्मनिरपेक्षता
जेलर ने अपने जूनियर से कहा "जाओ जेल में घोषणा करवा दो की कल श्रीराम कथा का पाठ है सब कैदियों को जमा होकर इस पाठ को शांति पूर्वक सुनना है।"
इतना सुनकर जेलर का जूनियर बोला" सर में प्रार्थना करता हूँ की सारा देश ही जेलखाना बन जाये।"
इसपर जेलर थोड़ा आश्चर्यचकित होकर बोला "मैं तुम्हारी बात समझा नहीं ।" जूनियर बोला" देखिये सर हम कई सालों से इस जेल में कभी श्रीराम का पाठ करवाते है कभी कुरान का पाठ कभी यीशु मसीह का लेसन और कभी सिक्खो के ग्रन्थ का पाठ और सारे कैदी बिना कुछ कहे इन सबको सुनते है चाहे वो किसी भी धर्म के हों वे कभी नहीं कहते की हम ये सब नहीं सुनेंगे।" जूनियर ने थोड़ी सांस ली और बोला " इसलिए में चाहता हूँ की मेरा सारा देश जेलखाना बन जाए ताकि वहां धर्म के नाम पर लोग बट ना सकें।"
जेलर ने उठते हुए कहा " काश तुम्हारी बात सच हो जाए तो हमारा देश स्वर्ग बन जाये।"
जेलर ने अपने जूनियर से कहा "जाओ जेल में घोषणा करवा दो की कल श्रीराम कथा का पाठ है सब कैदियों को जमा होकर इस पाठ को शांति पूर्वक सुनना है।"
इतना सुनकर जेलर का जूनियर बोला" सर में प्रार्थना करता हूँ की सारा देश ही जेलखाना बन जाये।"
इसपर जेलर थोड़ा आश्चर्यचकित होकर बोला "मैं तुम्हारी बात समझा नहीं ।" जूनियर बोला" देखिये सर हम कई सालों से इस जेल में कभी श्रीराम का पाठ करवाते है कभी कुरान का पाठ कभी यीशु मसीह का लेसन और कभी सिक्खो के ग्रन्थ का पाठ और सारे कैदी बिना कुछ कहे इन सबको सुनते है चाहे वो किसी भी धर्म के हों वे कभी नहीं कहते की हम ये सब नहीं सुनेंगे।" जूनियर ने थोड़ी सांस ली और बोला " इसलिए में चाहता हूँ की मेरा सारा देश जेलखाना बन जाए ताकि वहां धर्म के नाम पर लोग बट ना सकें।"
जेलर ने उठते हुए कहा " काश तुम्हारी बात सच हो जाए तो हमारा देश स्वर्ग बन जाये।"
Wednesday, September 7, 2016
शराफत
शराफ़त
"अरे यार राजू तो बहुत शरीफ लड़का है उससे तो में यूँ ही पैसे ले लूँगा और दूंगा भी नहीं और देखना वो मुझसे मांगेगा भी नहीं|" विकास ने सुरेंद्र से कहा और वो दोनों जोर जोर से हंसने लगे।
राजू ये सब सुन रहा था।
उसे बड़ा दुःख हुआ की परोपकार का ये नतीजा होता है इसी परोपकार की वजह से उसे काफी नुकसान हुआ था लेकिन वो सोचता था कि वे सब लोग मजबूर हैं इस कारण वो उसके पैसे दे नहीं पाते है।
बीरू, राजू का दोस्त जो उसे हमेशा समझाता रहता था कि ये लोग तुम्हारा गलत फायदा उठा रहे है लेकिन राजू नहीं समझता था आज उसे उसकी बात का अहसास हो रहा था की वह सही कहता था।
राजू ने अब विकास ओर सुरेंद्र को पैसे देने बंद कर दिए।
"यार सुरेंद्र, राजू तो बहुत बेकार आदमी है।" विकास ने राजू के पैसे ना देने पर प्रतिकिर्या की।
राजू अब बेकार आदमी था उनके लिए लेकिन अब शराफ़त छोड़ कर वह अच्छा आदमी था अपने लिए।
"अरे यार राजू तो बहुत शरीफ लड़का है उससे तो में यूँ ही पैसे ले लूँगा और दूंगा भी नहीं और देखना वो मुझसे मांगेगा भी नहीं|" विकास ने सुरेंद्र से कहा और वो दोनों जोर जोर से हंसने लगे।
राजू ये सब सुन रहा था।
उसे बड़ा दुःख हुआ की परोपकार का ये नतीजा होता है इसी परोपकार की वजह से उसे काफी नुकसान हुआ था लेकिन वो सोचता था कि वे सब लोग मजबूर हैं इस कारण वो उसके पैसे दे नहीं पाते है।
बीरू, राजू का दोस्त जो उसे हमेशा समझाता रहता था कि ये लोग तुम्हारा गलत फायदा उठा रहे है लेकिन राजू नहीं समझता था आज उसे उसकी बात का अहसास हो रहा था की वह सही कहता था।
राजू ने अब विकास ओर सुरेंद्र को पैसे देने बंद कर दिए।
"यार सुरेंद्र, राजू तो बहुत बेकार आदमी है।" विकास ने राजू के पैसे ना देने पर प्रतिकिर्या की।
राजू अब बेकार आदमी था उनके लिए लेकिन अब शराफ़त छोड़ कर वह अच्छा आदमी था अपने लिए।
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