Monday, January 30, 2017

पब्लिसिटी

संजय लीला भंसाली को करणी सेना के लोगो ने फिल्म शूटिंग के सेट पर थप्पड़ मारे,  क्या आपको इसमें सच्चाई नजर आती है? वजह ये हैं भंसाली के पास पर्सनल गार्ड है जिनके पास हथियार थे क्या वे भंसाली को हाथ भी लगाने देंगे, जब उनको थप्पड़ मारे तो कोई और फिल्म का कलाकार नहीं था जैसे की शहीद कपूर या दीपिका पादुकोण इत्यादि। तो मुझे तो ये एक फिल्म को प्रमोट करने का पब्लिसिटी स्टंट लग रहा है। भारत में तो ये होता ही है की जितनी विवादित फिल्म होगी उसकी हिट होने के उतने चांस है। मुझे तो भंसाली को जान बुझ कर इस विवाद को हवा देने की बू आ रही है। यदि भंसाली विवादित सीन को हटा दे तो सब ठीक हो सकता था लेकिन पब्लिसिटी कहाँ से मिलती फ्री में ।

Saturday, January 28, 2017

चुनावबाजी

हमने रंगबाजी का नाम तो सुना था लेकिन चुनावी माहौल में एक शब्द और जहन में आता है जो रंगबाजी का पर्याय हो सकता है वो है चुनावबाजी क्योंकि जैसे ही चुनाव आते है सब नेताओ की जुबान आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है। अब सब नेता एक दूसरे पर ऐसी ऐसी बातों का इल्जाम लगाएंगे की यदि उन बातों को वो अपने परिवार के साथ बैठ कर करें तो शायद वो उनको मुँह दिखाने लायक ना रहे। लेकिन भारत एक गणतंत्र राष्ट्र है और सबको बोलने की आजादी है। साथ ही साथ चुनाव आयोग नाम का कानून भी है लेकिन वो बेचारा बस चेतावनी देने भर का काम करता है। आज तक के इतिहास में कभी सुना है कि चुनाव आयोग ने किसी को भी अभद्र और अनैतिक भाषा बोलने के कारण चुनाव लड़ने से बेदख़ल किया हो या उसका नामांकन रदद् किया हो। तो क्यों हुई न रंगबाजी नेताओं द्वारा चुनावबाजी के रूप में।

ताजपुर जंगल में आतंकी

ताजपुर जंगल में शाम का समय था। हल्की हल्की सर्द हवा बह रही थी।आसमान में बादल थे ऐसा लग रहा था जैसे बरसात होगी। सब जानवर अपना खाना खा कर तेजी से अपने अपने घरों की तरफ जा रहे थे। बीनू बाज भी आसमान के रास्ते अपने घोसले की तरफ जा रहा था। आज वह अपने घोसले से बहुत दूर आ गया था इसलिए वह जल्दी से उड़ कर अपने घर पहुंचना चाहता था। अचानक उसकी निगाह नीचे एक पहाड़ी की ओट में पड़ी, उसने देखा की चार भेड़िये अपने मुहँ पर कपडा बांधे और अपने आप को दुसरे जानवरों से बचाते व् छुपाते हुए ताजपुर जंगल की तरफ बढ़ रहे थे।बीनू बाज को उनकी इस हरकत पर कुछ शक हुआ। उसने एक बार तो सोचा मरने दो मुझे क्या लेकिन उसने सुन रखा था की उसके जंगल पर आने वाले नए साल के मोके पर कुछ आतंकी हमला कर सकते है, तो उसने उन चारो भेड़ियों की हरकत के बारे में पता लगाने का निश्चय किया। वह धीरे से नीचे आया और एक पेड़ पर छुप कर बैठ गया। अब बीनू बाज तो उन चारो भेडियों को देख सकता था लेकिन वो चारो उसको नही देख सकते थे।
वो चारो भेड़िये भी उसी पेड़ के नीचे आकर बेठ गए। काले बादलों की वजह से अंधेरा होने लगा था। चारो भेड़ियों में से एक बोला- बस अब थोड़ी देर की बात है ताजपुर जंगल के सब जानवर सो जायेंगे और फिर हम उनपर हमला कर देंगे। दूसरा बोला- हां सब अपने अपने हथियार चेक कर लो। इतना कहने पर सबने अपने थेलों में छिपाई हुई आधुनिक बन्दुक को निकाल कर देखा और सबने एक साथ कहा-सब ठीक है। अब बीनू बाज भी घबरा गया और उसका शक ठीक था । अब उसने सोचा सब जंगल वालों को इसके बारे में बताना चाहिए जिससे वो अपने बचाव में कुछ कर सकें। वह तुरंत धीरे से उस पेड़ से उड़ा और अपने ताजपुर जंगल के द्वार पर पंहुचा। डर और घबराहट से वह पसीने पसीने हो रहा था। उसको इस हालत में देख कर खेमू खरगोश बोला-अरे बीनू इतना घबराये और बदहवास से कहाँ भागे जा रहे हो ? इतना सुनकर बीनू बाज रुका और नीचे आकर के खेमू खरगोश के पास बेठ गया। उसने जल्दी से उन आतंकी भेडियों की बात उसे बताई। अब खेमू खरगोश भी परेशान हो गया और काफ़ी घबरा गया।बीनू बाज जाने लगा और बोला-मुझे सारे जंगल वासियों को बताना पड़ेगा। इतना सुनकर खेमू खरगोश बोला- बीनू यदि तुम ये बात सारे जंगल को बताओगे तो सारे जंगल वासी घबरा जायेंगे तथा जंगल में ज्यादा हलचल और भगदड़ मच जायेगी इसे देखकर हो सकता है वो भेड़िये आज हमला ना करके फिर कभी करे और हो सकता है की अगली बार हमे ना पता लगे की वो कब हमला करेंगे इसलिए उन्हें हमें आज ही पकड़ना पड़ेगा और अपने जंगल को भी बचाना पड़ेगा। बीनू बाज को खेमू खरगोश की बात में दम लग रहा था। वह थोड़ी देर चुप होकर बोला-फिर हम दोनों कैसे अकेले अपने जंगल को बचायें? खेमू खरगोश बोला- हम दोनों ये नहीं कर सकते इसलिए हमे और साथी लेने पड़ेंगे, हमारे पास समय हे वो लोग सबके सो जाने पर ही हमला करेंगे। अब हल्की बरसात शुरू हो चुकी थी। इतने में खेमू खरगोश बोला-मुझे एक तरकीब सूझी है मेरे पीछे आओ। खेमू खरगोश और बीनू बाज जल्दी से ताजपुर जंगल के सेनापति चीनासिंह चीता के पास पहुंचे और उन्हें सारी बात जल्दी जल्दी बताई। वो उनकी इस बात से सहमत थे की उन्हें हमे आज ही और बिना किसी शोर शराबे के पकड़ना पड़ेगा।तभी खेमू खरगोश ने उन भेड़ियों को पकड़ने की एक योजना बताई तो वो खुश हुए।सेनापति बोला-हां ये ठीक रहेगा इससे हम उनको बिना किसी शोर शराबे के पकड़ सकेंगे। वो तीनो मिलकर अजगर भाईयोंके पास पहुंचे और उनको भी सारी बात बताई तो वो भी झट से उबके साथ चलने को तैयार हो गये। वो सब मिलकर जुगनू के मोहल्ले में पहुँचे और उनको भी बात बता कर अपने साथ ले लिया वो सब भी सहायता को तैयार हो गये और उनके साथ चल दिये। अब सब मिलकर बीनू बाज के पीछे उन छूपे भेडिये आतंकियों के ठिकाने की तरफ चल दिये। जब वो सब उन आतंकियों के पास पहुँच हए तो बीनू ने उन्हें रूकने का इशारा किया। अँधेरा काफी हो गया था और अब बरसात भी तेज थी लेकिन उन सब को दिख रहा था की वो आतंकी वहीँ छिपे हुए है। अब सेनापति चीनासिंह ने कहा- अब हमे अपनी योजना पर काम करना है। बीनू तुम अपनी चोंच में उठाकर इन अजगर भाइयों को पेड़ की डाल पर ठीक उन आतंकियों के सिर के ऊपर बेठाकर आओ। सेनापति ने अजगर भाइयों को खा की जैसे ही ये सब जुगनू पेड के एक साथ तेज रोशनीकरें तो तुम उन चारो भेड़ियों पर पेड़ पर से हमला कर के दबोच लेना और उसके बाद में और खेमू उनको जाल डालकर कैद कर लेंगे उन चारो ने सहमतिसे सिर हिलाया।बीनू ने वैसा ही किया और एक एक करके उन चारो अजगर भाइयों को  डाल पर अपनी चोंच से लेजा कर बेठा दिया था और उन आतंकियों को अहसास भी नही हुआ। उसके बाद खेमू ख़रगोश जुगनू के दल की तरफ इशारा किया तो वो लोग पेड़ के ऊपर झूंड में खड़े हो गये। जेसे ही खेमू खरगोश ने मुहँ से आवाज निकाली तो तुरंत जुगनू चमकाने लगे और इतनी रौशनी हो गई की वो आतंकी साफ़ दिखने लगे तुरंत ही चारो अजगर पेड़ से एक एक करके उन पर झपटे, इससे पहले की वो कुछ समझ पाते खेमू खरगोश और सेनापति चीतासिंह ने उन्हें जाल में पकड़कर कैद कर लिया और झटपट बीनू बाज ने उनके हथियार छीन लिए। वो अब पूरी तरह से कैद में थे । उनको पकड़ कर उसी समय जंगल के राजा शेरसिंह के सामने पेश किया गया। सेनापति ने सारी बात बिस्तार से राजा को बताई और ये भी बताई की इसके बारे में पहले आपको क्यों नही बताया गया था ताकि ज्यादा शोर शराबा ना हो और ये आतंकी भेड़ियेसतर्क होकर भाग ना जाएँ। राजा ने खेमू खरगोश, बीनू बाज, अजगर भाईयों और जुगनू भाइयों को उनकी बहादुरी का इनाम दिया और उन आतंकियों को कैद में डाल दिया।

Monday, January 23, 2017

सिक्केबंदी

ताजपुर जंगल में सब तरफ राजा शेर सिंह द्वारा की गई घोषणा की ही चर्चा थी। कल रात अचानक राजा शेर सिंह ने पुराने 100 और 50 के सिक्को पर प्रतिबन्ध लगा दिया था । उनका कहना था की लोगो ने काला बाजारी करके इन सिक्को को जमा कर रखा है जिससे की महंगाई बढ़ी है और कुछ लोगों ने इन सिक्को के नकली सिक्के भी बना लिए है और सबसे बड़ी बात ये है की पडोसी देश भी इन सिक्को की बदोलत अपने कुछ आतंकियों को इन्हें देकर उनके राज्य में आतंकी वारदात करवाता है। उन्होंने घोषणा की थी की इन सिक्को पर प्रतिबंध लगाने से ये सब गलत काम बंद हो जायेंगे। राजा शेर सिंह ने आगे कहा की इन बंद किये सिक्को के जगह नए दाम के सिक्के बाजार में उतारे जायेंगे, उसको आने में थोडा समय लगेगा और जिन जानवरों के पास ये पुराने सिक्के है वो उन्हें राज्य के कोषागार में जमा करा दे और उनकी जगह पर नए आने वाले सिक्के ले लें। सब जानवर परेशान थे की अब बिना इन सिक्को के वे कैसे अपने रोजमर्रा की चीजे खरीदेंगे क्योंकि ज्यादातर सबके पास 100 और 50 के ही सिक्के होते है।सब जानवर परेशान थे और इसी परेशानी में वे सब अपनी कॉलोनी के सरपंच हरी हिरन के पास पहुंचे। उन सब ने एक सुर में पुछा सरपंच जी हम इस मुसीबत से कैसे निपटे क्योंकी हमारे पास सब 100 और 50 के सिक्के है और नए सिक्के आने में समय लगेगा । इस पर सरपंच हरी हिरन थोडा सोच कर बोला " आप इस बात से तो सहमत होंगे की राजा शेर सिंह जी ने ये साहसी और बहुत कड़ा कदम लिया है जिससे हमारी और हमारे राज्य की भलाई ही होगी।" सबने हरी हिरन के सुर में सुर मिलाकर इसकी सराहना की। थोड़ी देर में कालू कुत्ता बोला "सरपंच जी आपकी बात ठीक है लेकिन जब हमारे पास सिक्के ही नही होंगे तो हम कैसे अपना और अपने बच्चो का पेट पालेंगे क्योंकि बिना सिक्को के हम ना तो कुछ खरीद पाएंगे और ना ही उन्हें कुछ खिला पिला पायेंगे।" सब जानवरों ने कालू कुत्ते की बातो का एक साथ समर्थन किया। अब सरपंच हरी हिरन भी थोड़ी परेशानी में था और उसे भी इस मुसीबत से बाहर निकलने का हल नही मिल रहा था। हरी हिरन ने सबको सांत्वना दी और कहा की वो इसका हल निकाल लेगा और किसी को भी परेशानी नही होने दी जायेगी। इतना सुनकर सब जानवर अपने अपने घर चले गए।शाम को हरी हिरन परेशान से अपने कमरे में टहल रहे थे, उनको परेशान देख उनकी पत्नी बोली "क्या बात है में देख रही हूँ आज आप ज्यादा ही परेशान नजर आ रहे हो?" अपनी पत्नी की बात सुनकर हरी हिरन बोला "हां थोड़ी परेशानी की बात तो है क्योंकि राजा शेर सिंह जी द्वारा जब से पुराने सिक्को को बंद करने का एलान हुआ है तब से सारे जानवर परेशान है की वो अब अपना खाने पीने का और अन्य जरूरी सामान कैसे खरीदेंगे क्योंकि सबके पास ज्यादातर वही सिक्के है।" हरी हिरन की बात सुनकर उसकी पत्नी बोली " बस इतनी बात है लेकिन ये भी तो सोचो की इन सिक्को के बंद करने से हम सबको कितना फायदा होगा।" रही बात परेशानी की तो यदि हम जंगलवासी मिलजुल कर एक दुसरे का सहारा बने तो इस परेशानी को आसानी से पार कर सकते है और अपने जंगल की तरक्की में सहयोग कर सकते है।" इतना कह कर हरी हिरन की पत्नी बाहर चली गई लेकिन हरि हिरन को उसकी मिलजुल कर परेशानी का सामना करने की बात अच्छी लगी और उसको एक युक्ति सूझी । उसने उसी समय पंचायत बुलाई। सब जानवर जमा हो गए थे। हरी हिरन ने पंचायत में जमा जानवरों को संबोधित करना शुरू किया " मित्रो यदि हम मिलजुल कर काम करें तो इस सिक्केबंदी की परेशानी को दूर कर सकते है।" इतना सुनकर कालू कुत्ता बोला " वो कैसे?" इस पर हरी हिरन बोला " देखो हम सब कुछ न कुछ काम करते है और हम सबका काम अलग अलग हे जिससे की हम अपना और अपने बच्चो का जीवन यापन करते है।" इतना सुनकर मनु तोता उतावला होकर बोला "लेकिन हम इससे अपनी परेशानी कैसे दूर कर सकते है?" हरी हिरन थोडा मुस्कराया और बोला "देखो हम ऐसे एक दुसरे की मदद से इस सिक्केबंदी से पार पा सकते है जैसे की गोरी गाय दूध बेचती है और खेमू खरगोश सब्जी उगाता है और यदि हमारे पास सिक्के ना हों तो हम ना दूध खरीद सकते है ना ही सब्जियाँ लेकिन यदि गौरी गाय बिना सिक्को के अपना दूध खेमू खरगोश को दे और वो इसके बदले गौरी गाय को सब्जियाँ दे तो हम बिना सिक्को के आपस में खाने पीने और अन्य रोजमर्रा की चीजे ले सकते है और हमे सिक्को की भी जरूरत भी नहीं पड़ेगी।" सब जानवर चुप थे इतने में मयूरी मोरनी बोली " में समझ गई जैसे की में दुकान चलाती हूँ और मेरे पास हर तरह का सामान है और यदि मुझे कपडे चाहिए तो में अपने सामान को भानु भेड़ को देकर उससे कपडे ले लूंगी जिससे उसकी और मेरी दोनों की जरूरते पूरी हो जायेंगी।" हरी हिरन बोला " बिलकुल सही समझी हो।" हर जानवर को समझ में आ गया था । अब हर जानवर एक दुसरे की मदद कर रहा था और उन्हें सिक्को की जरूरत भी नही थी। राजा शेर सिंह ने जब इस योजना के बारे में सुना तो हरी हिरन को इनाम दिया।

Thursday, January 12, 2017

तख्ती से टेबलेट तक

पुरानी कहावत है बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपया, लेकिन आज के संधर्भ में बात की जाए तो इसे इस तरीके से कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नही की बाप बड़ा ना मै, सबसे बड़ा समय।
ये इसलिए भी आज के समय में सही बैठता है क्योंकि जिस तेजी से समय बदल रहा है उस रफ़्तार को पकड़ना मनुष्य के लिए बहुत कठिन हो रहा है। इसे दूसरे तरीके से कह सकते है की छणिक भर में समय मनुष्य को पीछे छोड़ कर बहुत आगे बढ़ जाता है। इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण है मोबाइल फ़ोन, क्या कभी किसी मनुष्य ने सोचा होगा की वह तारो से जुड़े हुए फ़ोन को छोड़ कर वायरलेस वाले फ़ोन का भी इस्तेमाल कर पायेगा लेकिन समय और तकनीक ने ये भी कर दिखाया।इससे भी बड़ी बात है की हम उसी फ़ोन को अब अपनी पढाई और नई नई जानकारियों के लिय इस्तेमाल कर रहे है।
कल तक हम छोटी क्लासों में लिखने के लिए तख्ती का इस्तेमाल करते थे आज उसकी जगह शिक्षा में टेबलेट ने ले ली है। हम किताबो को पढने के लिए किन्द्ल का इस्तेमाल कर रहे है। तकनीक हमें और श्रेष्ठ बना रही है लेकिन क्या ये हमारे भविष्य के लिय ठीक है क्योंकि तख्ती और किताबे यदि पुरानी हो जाती या खराब हो जाती थी तो हम उसे रीसायकल या इस तरह से समाप्त कर सकते थे जिससे की प्राकृतिक वातावरण को भी नुकसान न हो। लेकिन क्या हम लोग टेबलेट या किन्द्ल को इस तरह से रीसायकल कर सकते है की जिससे हमारा प्राकृतिक वातावरण ख़राब न हो तो इसका एक ही जवाब आज के समय में होगा ना। हम तकनीक में आगे तो जा रहे है और समय भी तेजी से बदल रहा है लेकिन में ये मानता हूँ की समय पीछे जाए जिससे हम उन्ही पुरानी तख्तियो और किताबो को ही इस्तेमाल करे ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक अच्छा शुद्ध प्राकृतिक जीवन दे सकें।