Saturday, January 28, 2017

चुनावबाजी

हमने रंगबाजी का नाम तो सुना था लेकिन चुनावी माहौल में एक शब्द और जहन में आता है जो रंगबाजी का पर्याय हो सकता है वो है चुनावबाजी क्योंकि जैसे ही चुनाव आते है सब नेताओ की जुबान आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है। अब सब नेता एक दूसरे पर ऐसी ऐसी बातों का इल्जाम लगाएंगे की यदि उन बातों को वो अपने परिवार के साथ बैठ कर करें तो शायद वो उनको मुँह दिखाने लायक ना रहे। लेकिन भारत एक गणतंत्र राष्ट्र है और सबको बोलने की आजादी है। साथ ही साथ चुनाव आयोग नाम का कानून भी है लेकिन वो बेचारा बस चेतावनी देने भर का काम करता है। आज तक के इतिहास में कभी सुना है कि चुनाव आयोग ने किसी को भी अभद्र और अनैतिक भाषा बोलने के कारण चुनाव लड़ने से बेदख़ल किया हो या उसका नामांकन रदद् किया हो। तो क्यों हुई न रंगबाजी नेताओं द्वारा चुनावबाजी के रूप में।

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