पुरानी कहावत है बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपया, लेकिन आज के संधर्भ में बात की जाए तो इसे इस तरीके से कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नही की बाप बड़ा ना मै, सबसे बड़ा समय।
ये इसलिए भी आज के समय में सही बैठता है क्योंकि जिस तेजी से समय बदल रहा है उस रफ़्तार को पकड़ना मनुष्य के लिए बहुत कठिन हो रहा है। इसे दूसरे तरीके से कह सकते है की छणिक भर में समय मनुष्य को पीछे छोड़ कर बहुत आगे बढ़ जाता है। इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण है मोबाइल फ़ोन, क्या कभी किसी मनुष्य ने सोचा होगा की वह तारो से जुड़े हुए फ़ोन को छोड़ कर वायरलेस वाले फ़ोन का भी इस्तेमाल कर पायेगा लेकिन समय और तकनीक ने ये भी कर दिखाया।इससे भी बड़ी बात है की हम उसी फ़ोन को अब अपनी पढाई और नई नई जानकारियों के लिय इस्तेमाल कर रहे है।
कल तक हम छोटी क्लासों में लिखने के लिए तख्ती का इस्तेमाल करते थे आज उसकी जगह शिक्षा में टेबलेट ने ले ली है। हम किताबो को पढने के लिए किन्द्ल का इस्तेमाल कर रहे है। तकनीक हमें और श्रेष्ठ बना रही है लेकिन क्या ये हमारे भविष्य के लिय ठीक है क्योंकि तख्ती और किताबे यदि पुरानी हो जाती या खराब हो जाती थी तो हम उसे रीसायकल या इस तरह से समाप्त कर सकते थे जिससे की प्राकृतिक वातावरण को भी नुकसान न हो। लेकिन क्या हम लोग टेबलेट या किन्द्ल को इस तरह से रीसायकल कर सकते है की जिससे हमारा प्राकृतिक वातावरण ख़राब न हो तो इसका एक ही जवाब आज के समय में होगा ना। हम तकनीक में आगे तो जा रहे है और समय भी तेजी से बदल रहा है लेकिन में ये मानता हूँ की समय पीछे जाए जिससे हम उन्ही पुरानी तख्तियो और किताबो को ही इस्तेमाल करे ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक अच्छा शुद्ध प्राकृतिक जीवन दे सकें।
Thursday, January 12, 2017
तख्ती से टेबलेट तक
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वातावरण
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