गाजर का चोर
ताजपुर जंगल के राजा शेर सिंह ने अचानक अपातकाल मीटिंग बुलाई थी। सारे दरबारी जल्दी से आकर अपना आसन ग्रहण करने लगे। सबके मन में एक ही सवाल था की महाराज शेर सिंह ने ये मीटिंग क्यों बुलाई है? सबके मन में अलग अलग विचार आ रहे थे।थोड़ी देर में घोषणा हुई की महाराज पधार रहे है इतना सुनकर सब खड़े हो गये। राजा शेर सिंह दरबार में आये और उनके सिंहासन पर बैठते ही सब अपने अपने आसनों पर बेठ गये। राजा शेर सिंह ने बोलना शुरू किया " आप सब ये सोच रहे होंगे की मैने इतने कम समय में आपको एकत्रित होने को क्यों कहा, तो सुनिए जेसे की आपको पता है हमारी राजकुमारी को गाजर पसंद है लेकिन करीब एक महीने से हमारे खेत में से कोई गाजर चुराकर ले जा रहा है लेकिन कल तो वो चोर कुछ ज्यादा ही गाजर चुराकर ले गया जिससे अब राजकुमारी को खाने को भी कम पड रही है।" इतना कह कर राजा शेर सिंह थोडा चुप हुए और फिर बोले " हमें ये कहने में बड़ी शर्म महसूस हो रही है की हमारी इतनी बड़ी सेना भी उसे पकड़ने में असफल रही है।"
थोड़ी हिम्मत करके सेनापति घोडा सिंह खड़ा हुआ और सिर झुकाकर बोला "महाराज गुस्ताखी माफ़ लेकिन आप जानते ही है की हमने उस चोर को पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन वो हमारी पकड़ से बाहर है वो चालाक ही नही बहुत शातिर भी है।"
राजा शेर सिंह, सेनापति घोड़ा सिंह की बातों से संतुष्ट नहीं था। वह बोला "यदि हमारी सेना उस चोर को नही पकड़ पा रही है तो हम इस दरबार में घोषणा करते है की जो कोई भी उस चोर को पकड़ने में मदद करेगा उसे उचित इनाम दिया जाएगा।" इतना कह कर राजा शेर सिंह अपने सिंहासन पर से उठे और सेनापति घोड़ा सिंह की तरफ देख कर कहा की इस बात की घोषणा पूरे ताजपुर जंगल में करा दी जाए। इतना कह कर वो अपने महल की तरफ चले गये।
सेनापति घोड़ा सिंह भी इस चोर से परेशान थे क्योंकि उसको ना पकड़ने के कारण राजा शेर सिंह भी उनसे नाराज थे। उन्होंने तुरंत पुरे जंगल में घोषणा करवा दी।
सारे जंगल के जानवर उस चोर को पकड़ कर अपने राजा से इनाम पाने के बारे में सोच रहे थे और अब जंगल में चर्चा का विषय वह चोर ही था।
जंगल के आखिर में रानी कुतिया का घर था उसका पति शहर कमाने गया था और उसका एक बेटा था छोटा पप्पी जो सारे दिन सोता रहता था। रानी कुतिया ने घर के अन्दर जाकर आवाज दी "पप्पी उठ जाओ सूरज निकल आया ।" इतना कह कर पप्पी को पकड़ कर खड़ा किया और फिर बोली "पप्पी तुम सारे दिन सोते रहते हो ये अच्छी बात नही है देखो तुम कुछ काम धाम तो करते नही और निट्ठले सोते रहते हो।" वो फिर बोली "देखो हमारे पड़ोस के बाबु कुत्ते का बेटा कमा कर लाने लगा है।"
पप्पी को आज उसकी माँ की बात चुभ गई थी । वो खड़ा होकर बोला "माँ आज से में भी आपको अच्छा बनकर दिखाऊँगा।" इतना कह कर वो घर से निकल गया।
वो सीधा अपने दोस्त सोनू गिलहरी के पास पहुंचा। पप्पी को उदास देख सोनू बोला "अरे क्या बात है पप्पी तुम उदास हो कुछ हुआ है क्या?" पप्पी बोला "सोनू हमे भी कुछ काम करना चाहिए जिससे की हमारे माँ बाप का नाम रोशन हो क्योंकि माँ भी मेरी काम चोरी से तंग आ चुकी है, लेकिन हम करेंगे क्या ?" इस पर सोनू बोला "इतनी सी बात है, तुमने अपने राजा की घोषणा नहीं सुनी की जो कोई उनके राजमहल के खेत की गाजर के चोर को पकड़ेगा उसे इनाम दिया जाएगा।" पप्पी एक बार तो खुश हुआ लेकिन अगले ही पल वह उदास होते हुए बोला "सोनू जिस चोर को राजमहल के सिपाही नही पकड़ पाए उसे हम कैसे पकड़ेंगे ?" इस पर सोनू बोला "प्रयास करने में क्या जाता है।" इस पर पप्पी बोला "तो आओ आज से हम उस चोर को पकड़ने की तिकडम लड़ाते है।"
वो दोनों राजमहल के खेतो में पहुंचे। पप्पी ने वहाँ के सिपाहियों से बात की तो उसे पता चला की सिपाही सारी रात पहरा देते है लेकिन सुबह देखते है तो गाजर गायब मिलती है जबकि उनके सामने से ना कोई आता है और ना ही कोई जाता है।
पप्पी ने खेतों का जायजा लिया तो पाया की चोर पत्तो को ऐसे ही छोड़ जाता था और केवल गाजर ही ले जाता था। उसकी समझ में वो जानवर तो आ गया जो चोर था लेकिन वो उसे किसी दुसरे तरीके से पकड़ना चाहता था।
वो सोनू को लेकर पंसारी की दूकान पर गया उसने वहाँ से कुछ ख़रीदा और उसको लेकर वापिस राजा के गाजर के खेतों में पहुंचा। उसने गाजर के खेतो में कुछ किया और सोनू को लेकर वापिस अपने घर की तरफ चल दिया। रास्ते में सोनू ने पप्पी से पुछा "तुमने पंसारी की दूकान से क्या ख़रीदा और उसका गाजर के खेतों में क्या किया ।" पप्पी बोला "तुम सुबह देखना चोर खुद बोलेगा की मैंने चोरी की है ।" सोनू कुछ समझ नहीं पा रहा था। जबकि पप्पी मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
पप्पी सुबह होते ही सोनू के घर पहुंचा और उसे लेकर वैध दिनू बकरे की दूकान के सामने छुप कर बेठ गया। सोनू से रहा नही गया। वो बोला "पप्पी ये क्या हो रहा है मेरी कुछ समझ में नही आ रहा है।" पप्पी ने उसे चुप रहने को कहा और बोला "थोड़ी देर में चोर यहाँ अपना इलाज कराने आने वाला है।" थोड़ी देर इंतजार करने पर पप्पी ने सोनू को इशारा करके बताया "वो देखो चोर" सोनू ने उत्सुकता से देखा तो पाया की गंगू खरगोश अपना पेट पकडे तेजी से दीनू वैध की दुकान में घुसा। वो दोनों भी तुरंत अन्दर गए और उसे पकड़ कर राजा शेर सिंह के दरबार में ले गए। पप्पी बोला "महाराज ये रहा गाजर का चोर" राजा शेर सिंह चकित था उसने पप्पी से पुछा "तुमने एक दिन में ही इसको पकड़ लिया लेकिन ये कैसे साबित होता है की यही चोर है।" पप्पी बोला "महाराज इसके तीन सबूत है पहला ये की गाजर खरगोश का पसंदीदा भोजन है, दूसरा ये की खेतो में कड़ा पहरा होते हुए भी कोई आपकी गाजरों को चुरा लेता था और पत्तो को छोड़ देता था और ये तभी हो सकता है की कोई उन्हें जमीन के नीचे से रास्ता बना कर चुराए और आप जानते हो की खरगोश ही जमीन के अन्दर रास्ता बना सकता है और अंत में ये जो गंगू खरगोश पेट पकड़े खड़ा है वो इसलिए की मेने रात को गाजरों में जुलाब का चूर्ण लगा दिया था और उन्ही गाजर को खाने से इसका पेट खराब हुआ है। में कल जुलाब का चूर्ण लाया ये आप पंसारी से पता कर सकते है। में समझ तो गया था की ये गंगू खरगोश ही है जो चोर है लेकिन में उसे रंगे हाथ पकड़ना चाहता था। राजा शेर सिंह के थोड़े दबाव से ही गंगू खरगोश ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। सेनापति घोड़ा सिंह ने भी चैन की सांस ली।
राजा शेर सिंह ने पप्पी को इनाम दिया और उसे अपने महल में ख़ास गुप्तचर की नौकरी भी दी। सोनू गिलहरी अब समझा था और वो पप्पी का दोस्त होने पर गर्व महसूस कर रहा था।
अब पप्पी की माँ भी अपने बेटे से खुश थी।
Saturday, November 5, 2016
गाजर का चोर
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