Thursday, September 29, 2016

दिवाली के कपडे


दिवाली के कपडे
मकान मालकिन दिवाली पर घर की साफ़ सफाई करवा रही थी।
उसका बेटा भी उसके साथ था।
पास में ही उनकी नोकरानी अपने बेटे के साथ घर की सफाई कर रही थी।
नौकरानी का बेटा भी मालकिन के बेटे की उम्र का ही था।
"बेटा ये कपडे पहन लेना दिवाली पर" मालकिन ने पिछले साल के कपडे निकालकर अपने बेटे को कहा।
इस पर बेटा बोला "माँ अब तो ये एक साल पुराने हो गए मुझे नये कपड़े चाहिए ये में दिवाली पर नही पहनूंगा।"  माँ ने दुलार से कहा "बेटा ये बड़े महंगे कपड़े है और देखो नये ही तो हैं।" बेटे ने इठलाते हुए कहा "माँ कह दिया ना में नही पहनूंगा तो नही पहनूंगा मुझे नये चाहिए।" माँ ने भी वारी जाऊं वाली शक्ल बनाई और मुस्करा कर कहा "ठीक है नये ले लेना बस"
उसका बेटा बड़ा खुश हुआ।
उधर नोकरानी और उसका बेटा ये सब देख और सुन रहे थे। नोकरानी ने अपने बेटे के फटे कपड़ों की तरफ देखा। उधर उसका बेटा ललचाई निगाहों से मालकिन के बेटे के पुराने कपड़ो को देख रहा था।
नोकरानी समझ गई थी और अब उसका दिल भर आया।
उसने बड़ी मुस्किल से कहा "मालकिन ये पुराने कपड़े यदि आप मेरे बेटे को दे देंगी तो मेरे बेटे का भी दिल खुश हो जाएगा।"
मालकिन ने थोड़ी देर सोचा और कहा "ठीक हें ये लो कपडे।"
कपड़े लेकर नोकरानी का लड़का बहुत खुश हुआ।
इधर दोनों मालकिन और नोकरानी माँ खुश थी की उनके बेटे खुश है।
अंतर सिर्फ जरूरत का था।

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