Monday, October 3, 2016

अहिंसा

में जैसे ही मॉल से बाहर निकला तो देखा की एक युवक एक महंगी कार के पीछे भाग रहा था और कार के ड्राईवर साइड के शीशे पर हाथ मार कर ड्राईवर को बाहर आने को कह रहा था।
ड्राईवर ने अन्दर से ही इशारे से पुछा "क्या हुआ?" तो बाहर वाले युवक ने गुस्से में कहा "बाहर निकल तूने गाडी बेक करते व्यक्त मेरी खड़ी गाडी में खरोंच मारी है।"
सुनते ही कार में बेठा युवक गुस्से में बाहर आया और बाहर वाले युवक से बोला "तूने गाडी के हाथ कैसे लगाया, दोबारा लगा के दिखा फुटबॉल बना दूंगा थोड़ी ही तो खरोच है गाडी में।"
इतना सुनते ही पहला वाला युवक सहम गया और ढीला पड़ गया।
कार वाला युवक कार में बैठते हुए बोला "ये मत समझना की आज गाँधी जयंती है तो में चुपचाप अहिंसा से तुम्हारी बाते सुन लूँगा।" और वह कार लेकर चला गया।
वहां खड़ा बुजुर्ग बोला "वाकई यदि कार वाला युवक थोडा सख्त नहीं बोलता तो बाहर वाला युवक उसकी पिटाई कर देता।
इसपर दूसरा बुजुर्ग बोला "सही कहते हो आज के समय में छोटी हिंसा को उससे थोड़ी बड़ी हिंसा से ही हराया जा सकता है और अहिंसा तो बातो में ही ठीक लगती है।"

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