Saturday, October 1, 2016

रोटी के लिए

रोटी के लिए
पहली बार दिनेश का बुजुर्ग पिता शहर में आये थे।
रेलवे स्टेशन से बाहर आकर दिनेश ने ऑटो किराये पर लिया और उसमे अपने पिता के साथ अपने घर की तरफ चल दिए।
आधा रास्ता पार हुआ तो दिनेश के बुजुर्ग पिता बोले "बेटा ये शहर में सब लोग इधर से उधर भाग रहे है कोई स्कूटर से भाग रहा है कोई अपनी गाडी से भाग रहा है में देख रहा हूँ की किसी को एक दुसरे से बात करने का समय ही नहीं है ऐसा क्या हुआ है इन लोगो के साथ?"
दिनेश बोला "देखा पिताजी आप कहते हो ना की शहर में तुम क्या करते हो और मुझे कहते रहते हो की गाँव वापिस आ जाओ शहर ने क्या रखा है...आप ही देख लो लोग रोटी के लिए कितनी भाग दौड़ करते है।"
दिनेश के बुजुर्ग पिता थोड़ी देर सोच कर बोले "बेटा मेरे बाल ऐसे ही सफेद नही हुए है, ये दौड़ रोटी के लिए नही बल्कि ऐशो आराम की चीजो के लिए हो रही है क्योंकि रोटी अभी भी इतनी महंगी नहीं हुई की इंसान उसे इतनी मेहनत करके भी न पा सके।"
दिनेश को अपने पिता की बात सच लगी थी वाकई हम रोटी के नाम पर ऐशो आराम के पीछे भाग कर शहरो में अपना जीवन व्यर्थ कर रहे है। जिससे हम एक दुसरे से बाते करना ही भूल गए है और जीवन कैसे जीते है ये प्रश्न तो हमसे काफी पीछे छूट गया है।

No comments:

Post a Comment