किताबें
राजू की परीक्षाए खत्म होने वाली थी और उसे पूरा विश्वास था की वो जरूर पास हो जायेगा। उसने अपने वार्षिक पेपर बहुत अच्छी तरह तैयारी कर के दिए थे। अपनी परीक्षा का जब वह आखिरी पेपर देकर आया तो बड़ा खुश था आते ही अपनी माँ से बोला माँ मेरे सारे पेपर बहुत अच्छे गए है और में अच्छे नम्बरों से पास होऊंगा। माँ बोली अच्छी बात है मेहनत करोगे तो परिणाम भी अच्छा ही होगा। राजू ये कह कर बाहर खेलने के लिए निकल गया। शाम को जब वह खेल कर वापिस आया तो थोडा उदास था माँ ने पूछा क्या हुआ तो वो बोला माँ में अपनी इस क्लास की किताबे उस गरीब दिनेश को देना चाहता था जो की मेरे से एक क्लास पीछे है। माँ बोली तो इसमें क्या प्रॉब्लम है ? दे देना अपनी किताबे। राजू बोला लेकिन माँ इस साल से हर बार हर क्लास की किताबे बदलती रहेगी। अब हम किसी की पुरानी किताबे ना ही दे सकते है ना ही ले सकते है। माँ इससे कितने पेपर की बर्बादी होगी और साथ ही अब हमको हर बार नई किताबे खरीदनी पड़ेगी। माँ ये ऐसे नियम कोन बना सकता है ? माँ बोली ये नियम सरकारे ही बनाती है। राजू बोला माँ लेकिन सरकार को सोचना तो चाहिए ना की इससे कितने पेड़ो की बर्बादी होगी जिससे की कागज़ बनता है। एक तरफ तो हम पर्यावरण को बचाने के लिए कितने काम कर रहे है और एक तरफ हम कागज की बर्बादी होते हुए देखेंगे। इसपर माँ बोली बेटा इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। इतना कह कर माँ अपने काम में लग गई। राजू ने मन ही मन इसके खिलाफ आवाज उठाने की सोची। स्कूल परीक्षा के बाद बंद हो गए थे केवल टीचर्स ही पेपर्स की चेकिंग के लिए आ रहे थे। राजू भी अपने चार दोस्तों को लेकर अपनी क्लास टीचर के पास पहुंचा और उनसे कहा की हम लोगों को पेपर और पेड़ों को बचाने के लिए हर साल किताब बदलने के फैसले का विरोध करना चाहिए। इसपर टीचर बोली की हम भी चाहते है की ऐसा ना हो लेकिन ये सब शिक्षा विभाग से आदेश आते है जिसमे की कुछ प्राइवेट स्कूल के व्यक्ति और कुछ पब्लिशर्स भी होते है। वे सब चाहते है की किताबे हर साल बदले जिससे की प्राइवेट स्कूल और पब्लिशरों की मोनोपोली चलती रहे और उन्हें हर बार पैसे कमाने का मोका मिले उन्हें इससे कोई मतलब नहीं होता की पेड़ कटे या प्रयावरण ख़राब हो। यदि हम लोग इसमें आवाज उठाएंगे तो वो लोग हमसे बदला लेने के लिए हमारे तबादले कर सकते है और उनका मन करेगा तो वो हमें नौकरी से भी निकाल सकते है इसलिए इसमें बस तुम लोग ही अब कुछ कर सकते हो। इतना कह कर टीचर अपने काम में व्यस्त हो गई। स्कूल से बाहर आकर राजू अपने दोस्तों से बोला तुम क्या कहते हो हमें आगे शिक्षा विभाग में प्रयावरण और पेड़ो को बचाने के लिए शिकायत करनी चाहिए। उसके दोस्त बोले हमें बिलकुल करनी चाहिए इसमें दो फायदे है एक तो प्रयावरण बचेगा दूसरा हमें महंगे दामो में नई किताबे नहीं लेनी पड़ेगी हम लोग अपने सीनियर्स की पुरानी किताबो से भी काम चला सकते है। राजू ने भी सहमती से सिर हिलाया और वो लोग उनके जिले के शिक्षा अधिकारी के ऑफिस की तरफ चल दिए। वहां पहुँच कर उन लोगों ने अधिकारी के सामने अपनी बात बताई तो अधिकारी बोला बच्चो अभी आप बहुत छोटे हो अभी आप लोग पढाई करो और इन चक्करो में मत पड़ो। उस अधिकारी की शक्ल पर साफ़ लिखा था की वो इतनी आसानी से उनकी बात नहीं मानेगा। वह लगता ही था की वह भी नहीं चाहता की पुरानी किताबे ही स्कूल में चले। राजू और उसके दोस्त बाहर आ गए और सोचने लगे की इस अधिकारी को कैसे समझाए की इससे वातावरण सुधरेगा और नई किताबो से ज्यादा पेड़ कटेंगे तथा वातावरण पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा। राजू ने अपने दोस्तों के कानो में कुछ कहा और वो लोग तुरंत उस अधिकारी के ऑफिस के बाहर खड़े पेड़ो से चिपक गए। अब हर कोई आदमी उनको आते जाते देख कर पूछ रहा था की बच्चो तुम इन पेड़ो से क्यों चिपके हो तो वो सब एक सुर में बोलते की यह शिक्षा अधिकारी इन पेड़ो को काटना चाहता है लेकिन हम इन्हें काटना नहीं देना चाहते। उस ऑफिस के बाहर अब काफी लोग इक्कठा हो गए थे और किसी ने अन्दर जाकर उस अधिकारी को बताया की बाहर वो बच्चे पेड़ो से चिपके हुए है और आपके बारे में अनाप सनाप कह रहे है। वो अधिकारी बाहर आया और उन बच्चो को फिर समझाया । लेकिन राजू और उसके दोस्त अब जोर जोर से शोर मचाने लगे की हम इन पेड़ों को काटने नहीं देंगे। यह खबर पूरे शहर में फ़ैल गई और न्यूज़ चैनल वाले लोग भी इक्कठा हो गए। उस अधिकारी के अब पसीने छूटने लगे। मीडिया वाले राजू और उसके दोस्तों से पूछने लगे क्या बात है तो उन्होंने पेड़ से चिपके हुए ही कहा की आप ही बताइए जब नई नई किताबे छपेंगी तो पेड़ भी कटेंगे उनके पेपरों के लिए? मीडिया वाले बोले बिलकुल ठीक है। तो राजू बोला बस जब तक ये अधिकारी नई किताबों की जगह इन पुरानी सिलेबस की किताबों से ही पढ़ाने का आदेश नहीं देगा हम पेड़ों से नहीं हटेंगे। सारे मीडिया वाले समझ गए की राजू और उसके दोस्त उनके वातावरण और पेड़ों की रक्षा के साथ साथ अपने लिए किताब नई ना खरीदनी पड़े इसके लिए ये सब कर रहे थे। अब मीडिया वाले उस अधिकारी से बोले सर लड़के अपनी जिद्द पर अड़े है इनकी बात मान ही लीजिये वरना ये हटने वाले नहीं है। इस पर अधिकारी बोला ठीक है बच्चो में हारा में पुरानी किताबो से ही पढ़ाने का आदेश दूंगा पहले इन पेड़ो से हटो। इतना कहते ही राजू और उसके दोस्तों ने पेड़ों को छोड़ दिया और उस अधिकारी को धन्यवाद कहा। वहाँ खड़ी भीड़ ने राजू के इस आन्दोलन की प्रशंसा की। राजू और उसके दोस्त भी खुश थे।
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