Monday, January 30, 2017

पब्लिसिटी

संजय लीला भंसाली को करणी सेना के लोगो ने फिल्म शूटिंग के सेट पर थप्पड़ मारे,  क्या आपको इसमें सच्चाई नजर आती है? वजह ये हैं भंसाली के पास पर्सनल गार्ड है जिनके पास हथियार थे क्या वे भंसाली को हाथ भी लगाने देंगे, जब उनको थप्पड़ मारे तो कोई और फिल्म का कलाकार नहीं था जैसे की शहीद कपूर या दीपिका पादुकोण इत्यादि। तो मुझे तो ये एक फिल्म को प्रमोट करने का पब्लिसिटी स्टंट लग रहा है। भारत में तो ये होता ही है की जितनी विवादित फिल्म होगी उसकी हिट होने के उतने चांस है। मुझे तो भंसाली को जान बुझ कर इस विवाद को हवा देने की बू आ रही है। यदि भंसाली विवादित सीन को हटा दे तो सब ठीक हो सकता था लेकिन पब्लिसिटी कहाँ से मिलती फ्री में ।

Saturday, January 28, 2017

चुनावबाजी

हमने रंगबाजी का नाम तो सुना था लेकिन चुनावी माहौल में एक शब्द और जहन में आता है जो रंगबाजी का पर्याय हो सकता है वो है चुनावबाजी क्योंकि जैसे ही चुनाव आते है सब नेताओ की जुबान आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है। अब सब नेता एक दूसरे पर ऐसी ऐसी बातों का इल्जाम लगाएंगे की यदि उन बातों को वो अपने परिवार के साथ बैठ कर करें तो शायद वो उनको मुँह दिखाने लायक ना रहे। लेकिन भारत एक गणतंत्र राष्ट्र है और सबको बोलने की आजादी है। साथ ही साथ चुनाव आयोग नाम का कानून भी है लेकिन वो बेचारा बस चेतावनी देने भर का काम करता है। आज तक के इतिहास में कभी सुना है कि चुनाव आयोग ने किसी को भी अभद्र और अनैतिक भाषा बोलने के कारण चुनाव लड़ने से बेदख़ल किया हो या उसका नामांकन रदद् किया हो। तो क्यों हुई न रंगबाजी नेताओं द्वारा चुनावबाजी के रूप में।

ताजपुर जंगल में आतंकी

ताजपुर जंगल में शाम का समय था। हल्की हल्की सर्द हवा बह रही थी।आसमान में बादल थे ऐसा लग रहा था जैसे बरसात होगी। सब जानवर अपना खाना खा कर तेजी से अपने अपने घरों की तरफ जा रहे थे। बीनू बाज भी आसमान के रास्ते अपने घोसले की तरफ जा रहा था। आज वह अपने घोसले से बहुत दूर आ गया था इसलिए वह जल्दी से उड़ कर अपने घर पहुंचना चाहता था। अचानक उसकी निगाह नीचे एक पहाड़ी की ओट में पड़ी, उसने देखा की चार भेड़िये अपने मुहँ पर कपडा बांधे और अपने आप को दुसरे जानवरों से बचाते व् छुपाते हुए ताजपुर जंगल की तरफ बढ़ रहे थे।बीनू बाज को उनकी इस हरकत पर कुछ शक हुआ। उसने एक बार तो सोचा मरने दो मुझे क्या लेकिन उसने सुन रखा था की उसके जंगल पर आने वाले नए साल के मोके पर कुछ आतंकी हमला कर सकते है, तो उसने उन चारो भेड़ियों की हरकत के बारे में पता लगाने का निश्चय किया। वह धीरे से नीचे आया और एक पेड़ पर छुप कर बैठ गया। अब बीनू बाज तो उन चारो भेडियों को देख सकता था लेकिन वो चारो उसको नही देख सकते थे।
वो चारो भेड़िये भी उसी पेड़ के नीचे आकर बेठ गए। काले बादलों की वजह से अंधेरा होने लगा था। चारो भेड़ियों में से एक बोला- बस अब थोड़ी देर की बात है ताजपुर जंगल के सब जानवर सो जायेंगे और फिर हम उनपर हमला कर देंगे। दूसरा बोला- हां सब अपने अपने हथियार चेक कर लो। इतना कहने पर सबने अपने थेलों में छिपाई हुई आधुनिक बन्दुक को निकाल कर देखा और सबने एक साथ कहा-सब ठीक है। अब बीनू बाज भी घबरा गया और उसका शक ठीक था । अब उसने सोचा सब जंगल वालों को इसके बारे में बताना चाहिए जिससे वो अपने बचाव में कुछ कर सकें। वह तुरंत धीरे से उस पेड़ से उड़ा और अपने ताजपुर जंगल के द्वार पर पंहुचा। डर और घबराहट से वह पसीने पसीने हो रहा था। उसको इस हालत में देख कर खेमू खरगोश बोला-अरे बीनू इतना घबराये और बदहवास से कहाँ भागे जा रहे हो ? इतना सुनकर बीनू बाज रुका और नीचे आकर के खेमू खरगोश के पास बेठ गया। उसने जल्दी से उन आतंकी भेडियों की बात उसे बताई। अब खेमू खरगोश भी परेशान हो गया और काफ़ी घबरा गया।बीनू बाज जाने लगा और बोला-मुझे सारे जंगल वासियों को बताना पड़ेगा। इतना सुनकर खेमू खरगोश बोला- बीनू यदि तुम ये बात सारे जंगल को बताओगे तो सारे जंगल वासी घबरा जायेंगे तथा जंगल में ज्यादा हलचल और भगदड़ मच जायेगी इसे देखकर हो सकता है वो भेड़िये आज हमला ना करके फिर कभी करे और हो सकता है की अगली बार हमे ना पता लगे की वो कब हमला करेंगे इसलिए उन्हें हमें आज ही पकड़ना पड़ेगा और अपने जंगल को भी बचाना पड़ेगा। बीनू बाज को खेमू खरगोश की बात में दम लग रहा था। वह थोड़ी देर चुप होकर बोला-फिर हम दोनों कैसे अकेले अपने जंगल को बचायें? खेमू खरगोश बोला- हम दोनों ये नहीं कर सकते इसलिए हमे और साथी लेने पड़ेंगे, हमारे पास समय हे वो लोग सबके सो जाने पर ही हमला करेंगे। अब हल्की बरसात शुरू हो चुकी थी। इतने में खेमू खरगोश बोला-मुझे एक तरकीब सूझी है मेरे पीछे आओ। खेमू खरगोश और बीनू बाज जल्दी से ताजपुर जंगल के सेनापति चीनासिंह चीता के पास पहुंचे और उन्हें सारी बात जल्दी जल्दी बताई। वो उनकी इस बात से सहमत थे की उन्हें हमे आज ही और बिना किसी शोर शराबे के पकड़ना पड़ेगा।तभी खेमू खरगोश ने उन भेड़ियों को पकड़ने की एक योजना बताई तो वो खुश हुए।सेनापति बोला-हां ये ठीक रहेगा इससे हम उनको बिना किसी शोर शराबे के पकड़ सकेंगे। वो तीनो मिलकर अजगर भाईयोंके पास पहुंचे और उनको भी सारी बात बताई तो वो भी झट से उबके साथ चलने को तैयार हो गये। वो सब मिलकर जुगनू के मोहल्ले में पहुँचे और उनको भी बात बता कर अपने साथ ले लिया वो सब भी सहायता को तैयार हो गये और उनके साथ चल दिये। अब सब मिलकर बीनू बाज के पीछे उन छूपे भेडिये आतंकियों के ठिकाने की तरफ चल दिये। जब वो सब उन आतंकियों के पास पहुँच हए तो बीनू ने उन्हें रूकने का इशारा किया। अँधेरा काफी हो गया था और अब बरसात भी तेज थी लेकिन उन सब को दिख रहा था की वो आतंकी वहीँ छिपे हुए है। अब सेनापति चीनासिंह ने कहा- अब हमे अपनी योजना पर काम करना है। बीनू तुम अपनी चोंच में उठाकर इन अजगर भाइयों को पेड़ की डाल पर ठीक उन आतंकियों के सिर के ऊपर बेठाकर आओ। सेनापति ने अजगर भाइयों को खा की जैसे ही ये सब जुगनू पेड के एक साथ तेज रोशनीकरें तो तुम उन चारो भेड़ियों पर पेड़ पर से हमला कर के दबोच लेना और उसके बाद में और खेमू उनको जाल डालकर कैद कर लेंगे उन चारो ने सहमतिसे सिर हिलाया।बीनू ने वैसा ही किया और एक एक करके उन चारो अजगर भाइयों को  डाल पर अपनी चोंच से लेजा कर बेठा दिया था और उन आतंकियों को अहसास भी नही हुआ। उसके बाद खेमू ख़रगोश जुगनू के दल की तरफ इशारा किया तो वो लोग पेड़ के ऊपर झूंड में खड़े हो गये। जेसे ही खेमू खरगोश ने मुहँ से आवाज निकाली तो तुरंत जुगनू चमकाने लगे और इतनी रौशनी हो गई की वो आतंकी साफ़ दिखने लगे तुरंत ही चारो अजगर पेड़ से एक एक करके उन पर झपटे, इससे पहले की वो कुछ समझ पाते खेमू खरगोश और सेनापति चीतासिंह ने उन्हें जाल में पकड़कर कैद कर लिया और झटपट बीनू बाज ने उनके हथियार छीन लिए। वो अब पूरी तरह से कैद में थे । उनको पकड़ कर उसी समय जंगल के राजा शेरसिंह के सामने पेश किया गया। सेनापति ने सारी बात बिस्तार से राजा को बताई और ये भी बताई की इसके बारे में पहले आपको क्यों नही बताया गया था ताकि ज्यादा शोर शराबा ना हो और ये आतंकी भेड़ियेसतर्क होकर भाग ना जाएँ। राजा ने खेमू खरगोश, बीनू बाज, अजगर भाईयों और जुगनू भाइयों को उनकी बहादुरी का इनाम दिया और उन आतंकियों को कैद में डाल दिया।

Monday, January 23, 2017

सिक्केबंदी

ताजपुर जंगल में सब तरफ राजा शेर सिंह द्वारा की गई घोषणा की ही चर्चा थी। कल रात अचानक राजा शेर सिंह ने पुराने 100 और 50 के सिक्को पर प्रतिबन्ध लगा दिया था । उनका कहना था की लोगो ने काला बाजारी करके इन सिक्को को जमा कर रखा है जिससे की महंगाई बढ़ी है और कुछ लोगों ने इन सिक्को के नकली सिक्के भी बना लिए है और सबसे बड़ी बात ये है की पडोसी देश भी इन सिक्को की बदोलत अपने कुछ आतंकियों को इन्हें देकर उनके राज्य में आतंकी वारदात करवाता है। उन्होंने घोषणा की थी की इन सिक्को पर प्रतिबंध लगाने से ये सब गलत काम बंद हो जायेंगे। राजा शेर सिंह ने आगे कहा की इन बंद किये सिक्को के जगह नए दाम के सिक्के बाजार में उतारे जायेंगे, उसको आने में थोडा समय लगेगा और जिन जानवरों के पास ये पुराने सिक्के है वो उन्हें राज्य के कोषागार में जमा करा दे और उनकी जगह पर नए आने वाले सिक्के ले लें। सब जानवर परेशान थे की अब बिना इन सिक्को के वे कैसे अपने रोजमर्रा की चीजे खरीदेंगे क्योंकि ज्यादातर सबके पास 100 और 50 के ही सिक्के होते है।सब जानवर परेशान थे और इसी परेशानी में वे सब अपनी कॉलोनी के सरपंच हरी हिरन के पास पहुंचे। उन सब ने एक सुर में पुछा सरपंच जी हम इस मुसीबत से कैसे निपटे क्योंकी हमारे पास सब 100 और 50 के सिक्के है और नए सिक्के आने में समय लगेगा । इस पर सरपंच हरी हिरन थोडा सोच कर बोला " आप इस बात से तो सहमत होंगे की राजा शेर सिंह जी ने ये साहसी और बहुत कड़ा कदम लिया है जिससे हमारी और हमारे राज्य की भलाई ही होगी।" सबने हरी हिरन के सुर में सुर मिलाकर इसकी सराहना की। थोड़ी देर में कालू कुत्ता बोला "सरपंच जी आपकी बात ठीक है लेकिन जब हमारे पास सिक्के ही नही होंगे तो हम कैसे अपना और अपने बच्चो का पेट पालेंगे क्योंकि बिना सिक्को के हम ना तो कुछ खरीद पाएंगे और ना ही उन्हें कुछ खिला पिला पायेंगे।" सब जानवरों ने कालू कुत्ते की बातो का एक साथ समर्थन किया। अब सरपंच हरी हिरन भी थोड़ी परेशानी में था और उसे भी इस मुसीबत से बाहर निकलने का हल नही मिल रहा था। हरी हिरन ने सबको सांत्वना दी और कहा की वो इसका हल निकाल लेगा और किसी को भी परेशानी नही होने दी जायेगी। इतना सुनकर सब जानवर अपने अपने घर चले गए।शाम को हरी हिरन परेशान से अपने कमरे में टहल रहे थे, उनको परेशान देख उनकी पत्नी बोली "क्या बात है में देख रही हूँ आज आप ज्यादा ही परेशान नजर आ रहे हो?" अपनी पत्नी की बात सुनकर हरी हिरन बोला "हां थोड़ी परेशानी की बात तो है क्योंकि राजा शेर सिंह जी द्वारा जब से पुराने सिक्को को बंद करने का एलान हुआ है तब से सारे जानवर परेशान है की वो अब अपना खाने पीने का और अन्य जरूरी सामान कैसे खरीदेंगे क्योंकि सबके पास ज्यादातर वही सिक्के है।" हरी हिरन की बात सुनकर उसकी पत्नी बोली " बस इतनी बात है लेकिन ये भी तो सोचो की इन सिक्को के बंद करने से हम सबको कितना फायदा होगा।" रही बात परेशानी की तो यदि हम जंगलवासी मिलजुल कर एक दुसरे का सहारा बने तो इस परेशानी को आसानी से पार कर सकते है और अपने जंगल की तरक्की में सहयोग कर सकते है।" इतना कह कर हरी हिरन की पत्नी बाहर चली गई लेकिन हरि हिरन को उसकी मिलजुल कर परेशानी का सामना करने की बात अच्छी लगी और उसको एक युक्ति सूझी । उसने उसी समय पंचायत बुलाई। सब जानवर जमा हो गए थे। हरी हिरन ने पंचायत में जमा जानवरों को संबोधित करना शुरू किया " मित्रो यदि हम मिलजुल कर काम करें तो इस सिक्केबंदी की परेशानी को दूर कर सकते है।" इतना सुनकर कालू कुत्ता बोला " वो कैसे?" इस पर हरी हिरन बोला " देखो हम सब कुछ न कुछ काम करते है और हम सबका काम अलग अलग हे जिससे की हम अपना और अपने बच्चो का जीवन यापन करते है।" इतना सुनकर मनु तोता उतावला होकर बोला "लेकिन हम इससे अपनी परेशानी कैसे दूर कर सकते है?" हरी हिरन थोडा मुस्कराया और बोला "देखो हम ऐसे एक दुसरे की मदद से इस सिक्केबंदी से पार पा सकते है जैसे की गोरी गाय दूध बेचती है और खेमू खरगोश सब्जी उगाता है और यदि हमारे पास सिक्के ना हों तो हम ना दूध खरीद सकते है ना ही सब्जियाँ लेकिन यदि गौरी गाय बिना सिक्को के अपना दूध खेमू खरगोश को दे और वो इसके बदले गौरी गाय को सब्जियाँ दे तो हम बिना सिक्को के आपस में खाने पीने और अन्य रोजमर्रा की चीजे ले सकते है और हमे सिक्को की भी जरूरत भी नहीं पड़ेगी।" सब जानवर चुप थे इतने में मयूरी मोरनी बोली " में समझ गई जैसे की में दुकान चलाती हूँ और मेरे पास हर तरह का सामान है और यदि मुझे कपडे चाहिए तो में अपने सामान को भानु भेड़ को देकर उससे कपडे ले लूंगी जिससे उसकी और मेरी दोनों की जरूरते पूरी हो जायेंगी।" हरी हिरन बोला " बिलकुल सही समझी हो।" हर जानवर को समझ में आ गया था । अब हर जानवर एक दुसरे की मदद कर रहा था और उन्हें सिक्को की जरूरत भी नही थी। राजा शेर सिंह ने जब इस योजना के बारे में सुना तो हरी हिरन को इनाम दिया।

Thursday, January 12, 2017

तख्ती से टेबलेट तक

पुरानी कहावत है बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपया, लेकिन आज के संधर्भ में बात की जाए तो इसे इस तरीके से कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नही की बाप बड़ा ना मै, सबसे बड़ा समय।
ये इसलिए भी आज के समय में सही बैठता है क्योंकि जिस तेजी से समय बदल रहा है उस रफ़्तार को पकड़ना मनुष्य के लिए बहुत कठिन हो रहा है। इसे दूसरे तरीके से कह सकते है की छणिक भर में समय मनुष्य को पीछे छोड़ कर बहुत आगे बढ़ जाता है। इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण है मोबाइल फ़ोन, क्या कभी किसी मनुष्य ने सोचा होगा की वह तारो से जुड़े हुए फ़ोन को छोड़ कर वायरलेस वाले फ़ोन का भी इस्तेमाल कर पायेगा लेकिन समय और तकनीक ने ये भी कर दिखाया।इससे भी बड़ी बात है की हम उसी फ़ोन को अब अपनी पढाई और नई नई जानकारियों के लिय इस्तेमाल कर रहे है।
कल तक हम छोटी क्लासों में लिखने के लिए तख्ती का इस्तेमाल करते थे आज उसकी जगह शिक्षा में टेबलेट ने ले ली है। हम किताबो को पढने के लिए किन्द्ल का इस्तेमाल कर रहे है। तकनीक हमें और श्रेष्ठ बना रही है लेकिन क्या ये हमारे भविष्य के लिय ठीक है क्योंकि तख्ती और किताबे यदि पुरानी हो जाती या खराब हो जाती थी तो हम उसे रीसायकल या इस तरह से समाप्त कर सकते थे जिससे की प्राकृतिक वातावरण को भी नुकसान न हो। लेकिन क्या हम लोग टेबलेट या किन्द्ल को इस तरह से रीसायकल कर सकते है की जिससे हमारा प्राकृतिक वातावरण ख़राब न हो तो इसका एक ही जवाब आज के समय में होगा ना। हम तकनीक में आगे तो जा रहे है और समय भी तेजी से बदल रहा है लेकिन में ये मानता हूँ की समय पीछे जाए जिससे हम उन्ही पुरानी तख्तियो और किताबो को ही इस्तेमाल करे ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक अच्छा शुद्ध प्राकृतिक जीवन दे सकें।

Saturday, November 5, 2016

गाजर का चोर

गाजर का चोर
ताजपुर जंगल के राजा शेर सिंह ने अचानक अपातकाल मीटिंग बुलाई थी। सारे दरबारी जल्दी से आकर अपना आसन ग्रहण करने लगे। सबके मन में एक ही सवाल था की महाराज शेर सिंह ने ये मीटिंग क्यों बुलाई है? सबके मन में अलग अलग विचार आ रहे थे।थोड़ी देर में घोषणा हुई की महाराज पधार रहे है इतना सुनकर सब खड़े हो गये। राजा शेर सिंह दरबार में आये और उनके सिंहासन पर बैठते ही सब अपने अपने आसनों पर बेठ गये। राजा शेर सिंह ने बोलना शुरू किया " आप सब ये सोच रहे होंगे की मैने इतने कम समय में आपको एकत्रित होने को क्यों कहा, तो सुनिए जेसे की आपको पता है हमारी राजकुमारी को गाजर पसंद है लेकिन करीब एक महीने से हमारे खेत में से कोई गाजर चुराकर ले जा रहा है लेकिन कल तो वो चोर कुछ ज्यादा ही गाजर चुराकर ले गया जिससे अब राजकुमारी को खाने को भी कम पड रही है।" इतना कह कर राजा शेर सिंह थोडा चुप हुए और फिर बोले " हमें ये कहने में बड़ी शर्म महसूस हो रही है की हमारी इतनी बड़ी सेना भी उसे पकड़ने में असफल रही है।"
थोड़ी हिम्मत करके सेनापति घोडा सिंह खड़ा हुआ और सिर झुकाकर बोला "महाराज गुस्ताखी माफ़ लेकिन आप जानते ही है की हमने उस चोर को पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन वो हमारी पकड़ से बाहर है वो चालाक ही नही बहुत शातिर भी है।"
राजा शेर सिंह, सेनापति घोड़ा सिंह की बातों से संतुष्ट नहीं था। वह बोला "यदि हमारी सेना उस चोर को नही पकड़ पा रही है तो हम इस दरबार में घोषणा करते है की जो कोई भी उस चोर को पकड़ने में मदद करेगा उसे उचित इनाम दिया जाएगा।" इतना कह कर राजा शेर सिंह अपने सिंहासन पर से उठे और सेनापति घोड़ा सिंह की तरफ देख कर कहा की इस बात की घोषणा पूरे ताजपुर जंगल में करा दी जाए। इतना कह कर वो अपने महल की तरफ चले गये।
सेनापति घोड़ा सिंह भी इस चोर से परेशान थे क्योंकि उसको ना पकड़ने के कारण राजा शेर सिंह भी उनसे नाराज थे। उन्होंने तुरंत पुरे जंगल में घोषणा करवा दी।
सारे जंगल के जानवर उस चोर को पकड़ कर अपने राजा से इनाम पाने के बारे में सोच रहे थे और अब जंगल में चर्चा का विषय वह चोर ही था।
जंगल के आखिर में रानी कुतिया का घर था उसका पति शहर कमाने गया था और उसका एक बेटा था छोटा पप्पी जो सारे दिन सोता रहता था। रानी कुतिया ने घर के अन्दर जाकर आवाज दी "पप्पी उठ जाओ सूरज निकल आया ।" इतना कह कर पप्पी को पकड़ कर खड़ा किया और फिर बोली "पप्पी तुम सारे दिन सोते रहते हो ये अच्छी बात नही है देखो तुम कुछ काम धाम तो करते नही और निट्ठले सोते रहते हो।"  वो फिर बोली "देखो हमारे पड़ोस के बाबु कुत्ते का बेटा कमा कर लाने लगा है।"
पप्पी को आज उसकी माँ की बात चुभ गई थी । वो खड़ा होकर बोला "माँ आज से में भी आपको अच्छा बनकर दिखाऊँगा।" इतना कह कर वो घर से निकल गया।
वो सीधा अपने दोस्त सोनू गिलहरी के पास पहुंचा। पप्पी को उदास देख सोनू बोला "अरे क्या बात है पप्पी तुम उदास हो कुछ हुआ है क्या?" पप्पी बोला "सोनू हमे भी कुछ काम करना चाहिए जिससे की हमारे माँ बाप का नाम रोशन हो क्योंकि माँ भी मेरी काम चोरी से तंग आ चुकी है, लेकिन हम करेंगे क्या ?" इस पर सोनू बोला "इतनी सी बात है, तुमने अपने राजा की घोषणा नहीं सुनी की जो कोई उनके राजमहल के खेत की गाजर के चोर को पकड़ेगा उसे इनाम दिया जाएगा।" पप्पी एक बार तो खुश हुआ लेकिन अगले ही पल वह उदास होते हुए बोला "सोनू जिस चोर को राजमहल के सिपाही नही पकड़ पाए उसे हम कैसे पकड़ेंगे ?" इस पर सोनू बोला "प्रयास करने में क्या जाता है।" इस पर पप्पी बोला "तो आओ आज से हम उस चोर को पकड़ने की तिकडम लड़ाते है।"
वो दोनों राजमहल के खेतो में पहुंचे। पप्पी ने वहाँ के सिपाहियों से बात की तो उसे पता चला की सिपाही सारी रात पहरा देते है लेकिन सुबह देखते है तो गाजर गायब मिलती है जबकि उनके सामने से ना कोई आता है और ना ही कोई जाता है।
पप्पी ने खेतों का जायजा लिया तो पाया की चोर पत्तो को ऐसे ही छोड़ जाता था और केवल गाजर ही ले जाता था। उसकी समझ में वो जानवर तो आ गया जो चोर था लेकिन वो उसे किसी दुसरे तरीके से पकड़ना चाहता था।
वो सोनू को लेकर पंसारी की दूकान पर गया उसने वहाँ से कुछ ख़रीदा और उसको लेकर वापिस राजा के गाजर के खेतों में पहुंचा। उसने गाजर के खेतो में कुछ किया और सोनू को लेकर वापिस अपने घर की तरफ चल दिया। रास्ते में सोनू ने पप्पी से पुछा "तुमने पंसारी की दूकान से क्या ख़रीदा और उसका गाजर के खेतों में क्या किया ।" पप्पी बोला "तुम सुबह देखना चोर खुद बोलेगा की मैंने चोरी की है ।" सोनू कुछ समझ नहीं पा रहा था। जबकि पप्पी मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
पप्पी सुबह होते ही सोनू के घर पहुंचा और उसे लेकर वैध दिनू बकरे की दूकान के सामने छुप कर बेठ गया। सोनू से रहा नही गया। वो बोला "पप्पी ये क्या हो रहा है मेरी कुछ समझ में नही आ रहा है।" पप्पी ने उसे चुप रहने को कहा और बोला "थोड़ी देर में चोर यहाँ अपना इलाज कराने आने वाला है।" थोड़ी देर इंतजार करने पर पप्पी ने सोनू को इशारा करके बताया "वो देखो चोर" सोनू ने उत्सुकता से देखा तो पाया की गंगू खरगोश अपना पेट पकडे तेजी से दीनू वैध की दुकान में घुसा। वो दोनों भी तुरंत अन्दर गए और उसे पकड़ कर राजा शेर सिंह के दरबार में ले गए। पप्पी बोला "महाराज ये रहा गाजर का चोर"  राजा शेर सिंह चकित था उसने पप्पी से पुछा "तुमने एक दिन में ही इसको पकड़ लिया लेकिन ये कैसे साबित होता है की यही चोर है।" पप्पी बोला "महाराज इसके तीन सबूत है पहला ये की गाजर खरगोश का पसंदीदा भोजन है, दूसरा ये की खेतो में कड़ा पहरा होते हुए भी कोई आपकी गाजरों को चुरा लेता था और पत्तो को छोड़ देता था और ये तभी हो सकता है की कोई उन्हें जमीन के नीचे से रास्ता बना कर चुराए और आप जानते हो की खरगोश ही जमीन के अन्दर रास्ता बना सकता है और अंत में ये जो गंगू खरगोश पेट पकड़े खड़ा है वो इसलिए की मेने रात को गाजरों में जुलाब का चूर्ण लगा दिया था और उन्ही गाजर को खाने से इसका पेट खराब हुआ है। में कल जुलाब का चूर्ण लाया ये आप पंसारी से पता कर सकते है। में समझ तो गया था की ये गंगू खरगोश ही है जो चोर है लेकिन में उसे रंगे हाथ पकड़ना चाहता था। राजा शेर सिंह के थोड़े दबाव से ही गंगू खरगोश ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। सेनापति घोड़ा सिंह ने भी चैन की सांस ली।
राजा शेर सिंह ने पप्पी को इनाम दिया और उसे अपने महल में ख़ास गुप्तचर की नौकरी भी दी। सोनू गिलहरी अब समझा था और वो पप्पी का दोस्त होने पर गर्व महसूस कर रहा था।
अब पप्पी की माँ भी अपने बेटे से खुश थी।

सच्चाई का सच


सच्चाई का सच

आज टीचर सब बच्चो का होमवर्क चेक करने वाले है और इसी बात पर राजू की बैचेनी बढ़ रही थी | राजू ने जैसे ही क्लास में एंट्री की तो उसने देखा की उसका वातावरण बहुत ही गंभीर था क्योंकि इस पीरियड का टीचर बहुत सख्त था | वो पढ़ाने में तो सख्त था ही साथ में यदि कोई स्टूडेंट उसका होमवर्क नहीं करके लाता था तो वो उसको कड़ी सजा देता था | राजू वैसे तो पढाई में ठीक है लेकिन पिछले हफ्ते उसके चाचाजी की लड़की शादी थी इस कारण वो अपना होमवर्क नहीं कर पाया था | उसने मन ही मन सोचा आज तो ये टीचर मुझे नहीं छोड़ेगा |

कुछ देर में टीचर ने क्लास में कदम रखा तो सब लोग खामोश हो गए | टीचर ने अटेंडेंस ली और फिर वो एक एक करके सबका होमवर्क चेक करने लगा | राजू अब और भी ज्यादा नर्वस हो गया था | राजू कभी भी अपने होमवर्क के बारे में  झूठ नहीं बोलता था लेकिन आज उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था उसका मन कर रहा था की आज वो कुछ झूठ बोल दे | इतने में उसका नंबर आ गया | टीचर ने उससे होमवर्क की कॉपी मांगी तो राजू ने सही सही बता दिया लेकिन टीचर ने उसकी कोई बात नहीं सुनी और उसकी पिटाई करते हुए बोला की ऐसे बहाने उसने बहुत सुने है | राजू पिटाई से दुखी नहीं था बल्कि उसने जो सच बोला उसके बाद भी टीचर ने उसकी बात नहीं मानी वो उससे दुखी था |

राजू ने सोचा की जब सच्चाई पर भी उसकी पिटाई हुई है तो आगे से वो झूठ ही बोलेगा जिससे की वो पिटाई से बच सके |

अब जब भी कोई काम होता तो राजू झूठ बोल देता था और वो टीचर की पिटाई से बच जाता था | इस कारण अब वो पढाई के प्रति लापरवाह हो गया था क्योंकि उसे पता था की वो झूठ बोल कर बच जाएगा |

राजू के पापा उसको बहुत दिनों से देख रहे थे की राजू पढाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था और थोडा लापरवाह भी हो गया था | उसके पापा ने जब पूछा तो उसने सब सच बता दिया | अब राजू के पापा भी परेशान हो गये | उन्हें पता था की राजू जो कर रहा था वो गलत था लेकिन उसके टीचर ने जो किया था वो भीं गलत था | राजू के पापा ने राजू और उसके टीचर को एक साथ बैठाया | राजू के पापा ने टीचर को राजू के बारे में सब सच बता दिया | टीचर उनकी बात सुनकर स्तब्ध रह गया | टीचर ने कुछ देर सोचा और फिर राजू के पिता की तरफ मुखातिब होकर बोला “ अब आप ही बताएं की हम कोई बच्चा झूट बोल रहा है या सच इसका पता कैसे लगायें ?” अब स्तब्ध होने की बारी राजू के पिता की थी |

राजू के पिता काफी देर तक सोचते रहे लेकिन उनकी समझ में टीचर के सवाल का जवाब नही आ रहा था |

कुछ देर सोचने के बाद टीचर बोला “ देखिये इस सवाल का जवाब आप तो क्या कोई भी नही दे पायेगा और ये जब से सृष्टि बनी है तब से ही ये सवाल ज्यो का त्यों है इसलिए हमे इसको ऐसे ही छोड़ देना चाहिए और अपनी इन्द्रियों का इस्तेमाल और भी अच्छी तरीके से करना चाहिए और उनके अनुसार अपने अपने कर्म करने चाहिए जैसे की राजू यदि झूठ का साथ देता है तो आपको उसको देखते रहना है की वो कोई ऐसी हरकत तो नही कर रहा जिससे लगे की वो कुछ गलत कर रहा है और यदि वो ऐसा कर रहा है तो उसको आपको टोकना है और उसे सच्चाई पर चलने को कहना है | में भी अपनी इंद्री का और अच्छी तरह से इस्तेमाल करूंगा ताकि जो सच बोल रहा हो उसके साथ अन्याय न हो |”

राजू के पिता अब थोडा संतुष्ट हुए | वे टीचर की बातों से समझ गए थे की सच्चाई का सच पता लगाना मुस्किल है आज के जमाने में