Sunday, May 31, 2020

कभी तो होगा न्याय

मेरा क्या कसूर!

क्या न्याय मिलेगा
क्या कोई बताएगा क्या गलती है मनुष्य की
उसने क्या किया की
इतनी मृत्यु हो गई
वो तो पाल रहा था अपना परिवार
वो तो लड़ रहा था गरीबी भूख से
उसकी क्या गलती थी
जो बेरोजगार हो गया चला अपने घर की ओर
पैदल ही, मर गया रेल ट्रैक पर
मर गया भूख गर्मी से
दे रहीं है माताएं बहने खुले में बच्चों को जन्म
दे रही नया जीवन फिर मरने के लिए
क्या गलती है उनकी, यही की फिर कोई देश वायरस फैलाये
ओर मर जाये कोई निर्दोष बिना गलती के
कोई करेगा न्याय या दोहरी मार पड़ती रहेगी उस निर्दोष गरीब पर
शायद नही लेकिन प्रकृति नही छोड़ेगी उनको देगी भूकम्प देगी तूफान, देगी टिड्डियाँ
लेकिन क्या कोई न्याय करेगा उस देश के खिलाफ जो फैलाता है वायरस
इंतजार है
कभी तो कुदरत भी न्याय करेगी विध्वंस छोड़ कर।

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