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Thursday, June 24, 2021
Wednesday, June 23, 2021
Tuesday, May 11, 2021
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Monday, January 25, 2021
Saturday, August 1, 2020
लघुकथा आज के संदर्भ में
डॉक्टर साहब
रज्जो का रोकर बुरा हाल था। उसका आदमी थोड़ी देर पहले ही इलाज न मिलने की वजह से मर गया था। वह समय पर अस्पताल से पांच रुपये की पर्ची नही कटा पाई थी। खाने को पैसे नही थे तो इलाज के लिए पांच रुपये कहाँ से आते।
लाश गेट पर ही थी।
तभी बड़े डॉक्टर साहब आये। वार्ड बॉय ने डॉक्टर को सारा माजरा बताया।
डॉक्टर साहब बहुत गुस्सा हुए। सब स्टाफ को बुरी तरह डाँट लगाई की एक पांच रुपये की पर्ची की वजह से मरीज मर गया । डॉक्टर को आत्मग्लानि हो रही थी।
वह रज्जो के पास आया और उससे अपने अस्पताल की तरफ से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी।
रज्जो अभी भी रो रही थी।
'डॉक्टर साहब इसमें किसी की गलती नही। मेरे पति ने ही किसी के आगे हाथ फैलाने से मना किया था, हम सब दो दिन से भूखे है वो मर गए लेकिन हाथ नही फैलाया।' वह अपने आंसू पोंछते हुए बोली, उसने अपने नन्हे बच्चे को कंधे से लगा लिया।
डॉक्टर साहब ने अपनी जेब से निकाले पैसे वापिस रख लिए जो वो उसे देने वाला था लेकिन उसकी खुद्दारी देख वह भी आश्चर्यचकित था। वह समझ गया था कि ये परिवार मर जायेगा लेकिन पैसे नही लेगा।
डॉक्टर अपने रूम में पहुंचा और वार्ड बॉय को बुलाकर कुछ समझाया।
वार्ड बॉय वापिस लाश के पास आया। उसने रज्जो को आवाज देकर लाश के पास बुलाया और कहा 'इनका अंतिम संस्कार करना है इनकी जेब देख लो कोई सामान तो नही है।' रज्जो जानती थी कि क्या मिलेगा उनकी जेब मे लेकिन जब वार्ड बॉय ने कहा कि ये रूल है तो रज्जो ने अपने पति की पेंट की जेब टटोली, उसमें 2700 रुपये थे। रज्जो को विश्वास नही था कि उनके पास इतने पैसे थे तो उन्होंने इलाज के लिए पैसे क्यों नही निकाले? वह निरुत्तर थी। वार्ड बॉय लाश को हॉस्पिटल में ले गया। उसकी आंखों में डॉक्टर साहब के प्रति सम्मान था। उन्होंने ही ये पैसे रज्जो के पति की जेब मे रखवाए थे और उसका अंतिम संस्कार भी अपने पैसो से कराने को कहा था। उन्होंने एक एन जी ओ को भी फ़ोन किया और स्वाभिमानी रज्जो के लिए काम का बंदोबस्त कर दिया ताकि वह अपने पति की तरह इज्जत की जिंदगी जी सके।
रज्जो अपने पति को अंतिम बार देख अपने बच्चे को ले हॉस्पिटल से निकल गई।
डॉक्टर साहब मायूस थे लेकिन उन्होंने आवाज दी 'सिस्टर, एक एक करके पेशेंट भेजना शुरू करो।'
उन्होंने मानव धर्म निभा दिया था और अब कर्म की बारी थी।
रज्जो का रोकर बुरा हाल था। उसका आदमी थोड़ी देर पहले ही इलाज न मिलने की वजह से मर गया था। वह समय पर अस्पताल से पांच रुपये की पर्ची नही कटा पाई थी। खाने को पैसे नही थे तो इलाज के लिए पांच रुपये कहाँ से आते।
लाश गेट पर ही थी।
तभी बड़े डॉक्टर साहब आये। वार्ड बॉय ने डॉक्टर को सारा माजरा बताया।
डॉक्टर साहब बहुत गुस्सा हुए। सब स्टाफ को बुरी तरह डाँट लगाई की एक पांच रुपये की पर्ची की वजह से मरीज मर गया । डॉक्टर को आत्मग्लानि हो रही थी।
वह रज्जो के पास आया और उससे अपने अस्पताल की तरफ से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी।
रज्जो अभी भी रो रही थी।
'डॉक्टर साहब इसमें किसी की गलती नही। मेरे पति ने ही किसी के आगे हाथ फैलाने से मना किया था, हम सब दो दिन से भूखे है वो मर गए लेकिन हाथ नही फैलाया।' वह अपने आंसू पोंछते हुए बोली, उसने अपने नन्हे बच्चे को कंधे से लगा लिया।
डॉक्टर साहब ने अपनी जेब से निकाले पैसे वापिस रख लिए जो वो उसे देने वाला था लेकिन उसकी खुद्दारी देख वह भी आश्चर्यचकित था। वह समझ गया था कि ये परिवार मर जायेगा लेकिन पैसे नही लेगा।
डॉक्टर अपने रूम में पहुंचा और वार्ड बॉय को बुलाकर कुछ समझाया।
वार्ड बॉय वापिस लाश के पास आया। उसने रज्जो को आवाज देकर लाश के पास बुलाया और कहा 'इनका अंतिम संस्कार करना है इनकी जेब देख लो कोई सामान तो नही है।' रज्जो जानती थी कि क्या मिलेगा उनकी जेब मे लेकिन जब वार्ड बॉय ने कहा कि ये रूल है तो रज्जो ने अपने पति की पेंट की जेब टटोली, उसमें 2700 रुपये थे। रज्जो को विश्वास नही था कि उनके पास इतने पैसे थे तो उन्होंने इलाज के लिए पैसे क्यों नही निकाले? वह निरुत्तर थी। वार्ड बॉय लाश को हॉस्पिटल में ले गया। उसकी आंखों में डॉक्टर साहब के प्रति सम्मान था। उन्होंने ही ये पैसे रज्जो के पति की जेब मे रखवाए थे और उसका अंतिम संस्कार भी अपने पैसो से कराने को कहा था। उन्होंने एक एन जी ओ को भी फ़ोन किया और स्वाभिमानी रज्जो के लिए काम का बंदोबस्त कर दिया ताकि वह अपने पति की तरह इज्जत की जिंदगी जी सके।
रज्जो अपने पति को अंतिम बार देख अपने बच्चे को ले हॉस्पिटल से निकल गई।
डॉक्टर साहब मायूस थे लेकिन उन्होंने आवाज दी 'सिस्टर, एक एक करके पेशेंट भेजना शुरू करो।'
उन्होंने मानव धर्म निभा दिया था और अब कर्म की बारी थी।
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